नगर पंचायत के वार्ड नंबर 10 स्थित महाराजा अग्रसेननगर में शुक्रवार रात श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का शुभारंभ हुआ। प्रथम दिवस पर श्रद्धालुओं में श्रद्धा और भक्ति का अनुपम संगम देखने को मिला। काशी धाम से पधारे प्रसिद्ध कथावाचक स्वामी दिनेशानंद महाराज ने कथा के पहले दिन ज्ञान, भक्ति और वैराग्य के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। कथावाचक स्वामी दिनेशानंद महाराज ने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा श्रवण से भक्ति, ज्ञान और वैराग्य तीनों फल एक साथ प्राप्त होते हैं। उन्होंने धुंधकारी और गोकर्ण जी के अद्भुत चरित्र का वर्णन करते हुए समझाया कि भागवत कथा न केवल जीवन में उद्धार करती है, बल्कि मृत्यु के बाद भी मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करती है। धुंधकारी द्वारा प्रेत योनि में रहते हुए भागवत कथा श्रवण से मुक्ति प्राप्त करने की कथा सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। स्वामी जी ने आगे कहा कि श्रीमद्भागवत कथा मोक्षदायिनी है, जो सभी जीवों का उद्धार करती है। यह जीवन के सत्य का ज्ञान कराते हुए धर्म और अधर्म के अंतर को स्पष्ट करती है। उन्होंने बताया कि कथा श्रवण से मानव जीवन धन्य हो जाता है, क्योंकि श्रीमद्भागवत में ही जीवन का सार निहित है। यह प्रेम, करुणा और श्रद्धा की महत्ता को भी समझाती है। उन्होंने श्रद्धालुओं से जीवन में कम से कम एक बार श्रीमद्भागवत कथा श्रवण करने का आह्वान किया। कथा के दौरान स्वामी जी ने यह भी कहा कि परमात्मा अदृश्य होते हुए भी हर प्राणी में विद्यमान हैं। भागवत के श्रोता के भीतर जिज्ञासा और श्रद्धा का होना आवश्यक है, तभी कथा का पूर्ण फल प्राप्त होता है। इस अवसर पर धर्मात्मा कसौधन, कमला देवी, राजेश कुमार, आशीष कसौधन, अनुराग, अंकित, पप्पू कसौधन, अशोक गुप्ता, संजय कसौधन, संगम लाल, नन्दकिशोर, प्रदीप और भरत सहित कई श्रद्धालु मौजूद रहे।
महाराजा अग्रसेननगर में भागवत कथा ज्ञान यज्ञ शुरू:काशी धाम के स्वामी दिनेशानंद महाराज ने किया शुभारंभ
नगर पंचायत के वार्ड नंबर 10 स्थित महाराजा अग्रसेननगर में शुक्रवार रात श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का शुभारंभ हुआ। प्रथम दिवस पर श्रद्धालुओं में श्रद्धा और भक्ति का अनुपम संगम देखने को मिला। काशी धाम से पधारे प्रसिद्ध कथावाचक स्वामी दिनेशानंद महाराज ने कथा के पहले दिन ज्ञान, भक्ति और वैराग्य के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। कथावाचक स्वामी दिनेशानंद महाराज ने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा श्रवण से भक्ति, ज्ञान और वैराग्य तीनों फल एक साथ प्राप्त होते हैं। उन्होंने धुंधकारी और गोकर्ण जी के अद्भुत चरित्र का वर्णन करते हुए समझाया कि भागवत कथा न केवल जीवन में उद्धार करती है, बल्कि मृत्यु के बाद भी मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करती है। धुंधकारी द्वारा प्रेत योनि में रहते हुए भागवत कथा श्रवण से मुक्ति प्राप्त करने की कथा सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। स्वामी जी ने आगे कहा कि श्रीमद्भागवत कथा मोक्षदायिनी है, जो सभी जीवों का उद्धार करती है। यह जीवन के सत्य का ज्ञान कराते हुए धर्म और अधर्म के अंतर को स्पष्ट करती है। उन्होंने बताया कि कथा श्रवण से मानव जीवन धन्य हो जाता है, क्योंकि श्रीमद्भागवत में ही जीवन का सार निहित है। यह प्रेम, करुणा और श्रद्धा की महत्ता को भी समझाती है। उन्होंने श्रद्धालुओं से जीवन में कम से कम एक बार श्रीमद्भागवत कथा श्रवण करने का आह्वान किया। कथा के दौरान स्वामी जी ने यह भी कहा कि परमात्मा अदृश्य होते हुए भी हर प्राणी में विद्यमान हैं। भागवत के श्रोता के भीतर जिज्ञासा और श्रद्धा का होना आवश्यक है, तभी कथा का पूर्ण फल प्राप्त होता है। इस अवसर पर धर्मात्मा कसौधन, कमला देवी, राजेश कुमार, आशीष कसौधन, अनुराग, अंकित, पप्पू कसौधन, अशोक गुप्ता, संजय कसौधन, संगम लाल, नन्दकिशोर, प्रदीप और भरत सहित कई श्रद्धालु मौजूद रहे।





































