इमाम हुसैन के सिद्धांत मानवता के लिए मशाल:हल्लौर में मौलाना शाहकार हुसैन ने कहा- जो हक की राह पर चलने की प्रेरणा देते हैं

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डुमरियागंज तहसील के शिया बहुल हल्लौर में शुक्रवार को जश्न-ए-विलादत इमाम हुसैन की पूर्व संध्या पर एक भव्य ‘महफिल-ए-नूर’ का आयोजन किया गया। अंजुमन फरोग-ए-मातम के तत्वावधान में यह कार्यक्रम गांव के ऐतिहासिक ‘इमामबाड़ा वक्फ शाह आलमगीर सानी’ में पूरी अकीदत और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता हल्लौर जमा मस्जिद के धर्मगुरु मौलाना शाहकार हुसैन ज़ैदी ने की। उन्होंने इमाम हुसैन के जीवन और उनके सिद्धांतों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि इमाम हुसैन के सिद्धांत पूरी मानवता के लिए एक मशाल की तरह हैं, जो जुल्म के खिलाफ खड़े होने और हक की राह पर चलने की प्रेरणा देते हैं। महफिल की शुरुआत कारी शकील अहमद ने ‘तिलावत-ए-कलाम-ए-पाक’ से की। कार्यक्रम का संचालन प्रसिद्ध नाजिम जाहिद कानपुरी ने किया, जिसमें अजीम रिजवी ने उनका सहयोग किया। इस महफिल में देश के विभिन्न हिस्सों से आए मेहमान शायरों के साथ स्थानीय रचनाकारों ने अपने कलाम और मनकबत के माध्यम से इमाम हुसैन को नजराना-ए-अकीदत पेश किया। प्रमुख शायरों में मीसम गोपालपुरी, मुनव्वर जलालपुरी, वसी अब्बास, नज़र सुल्तानपुरी, शाहिद कमल, अली शब्बार नौगवी और शुजा उतरौलवी शामिल थे, जिन्होंने अपने कलाम से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। स्थानीय शायरों में शमशाद हल्लौरी, फलक हल्लौरी, अफसर हल्लौरी, मंज़र मास्टर, खुलूस हल्लौरी, हानी और बशारत ने भी सराहनीय प्रस्तुतियां दीं। इमामबाड़ा प्रांगण को आकर्षक विद्युत झालरों से सजाया गया था, जो कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा। कड़ाके की ठंड के बावजूद बड़ी संख्या में अकीदतमंद देर रात तक महफिल में डटे रहे। कार्यक्रम के अंत में, समाजसेवी कासिम रिजवी ने धार्मिक व सामाजिक क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले ग्रामीणों को अंग वस्त्र और स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया। अंजुमन के सचिव इकबाल अतहर ने सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर अंजुमन के सदर इंजीनियर मेहंदी हैदर, कन्वीनर तस्कीन रिजवी, ताशबीब हसन, मंज़र इमाम, जानशीन हैदर, शबीह हैदर, नफीस एडवोकेट, काज़िम रज़ा और वज़ीर हैदर सहित भारी संख्या में लोग उपस्थित रहे।
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