हर्रैया विधानसभा स्थित मखौड़ा मंदिर परिसर में वरिष्ठ समाजसेवी चंद्रमणि पांडेय ‘सुदामा’ के नेतृत्व में मनोरमा नदी की सफाई सुनिश्चित कराने हेतु एक बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में नदी की उपेक्षा और गंदगी पर गहरी चिंता व्यक्त की गई। बैठक में उपस्थित सभी लोगों ने मखभूमि मखौड़ा में गंदे नाले में परिवर्तित घृत नाला, बदहाल घाटों और अपूर्ण मंदिर के साथ-साथ नदी में व्याप्त गंदगी पर चिंता जताई। उन्होंने मनोरमा नदी की तत्काल सफाई मनरेगा मजदूरों, सफाई कर्मियों और मशीनों से कराने की मांग की। अन्य मांगों में घाघरा को मनवर से मिलाकर जल की प्रचुरता सुनिश्चित करना, मंदिर परिसर में कूड़ेदान रखना और सफाई कर्मी तैनात करना, नदी में अपशिष्ट पदार्थ डालने वालों के विरुद्ध दंडात्मक कार्यवाही करना शामिल था। श्री पांडेय ने मनोरमा को अविरल और निर्मल बनाने, नदी सीमा का सीमांकन कर कृषि कार्य, दुकान, मकान, स्कूल, अस्पताल के नाम पर व्याप्त अतिक्रमण समाप्त करने तथा नदी तट पर लगने वाली मांस-मछली की दुकानों को हटाने की भी मांग की, जिसका सभी ने समर्थन किया। बैठक में कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि मनोरमा और रामरेखा नदी की सफाई हेतु मनरेगा बजट को वीडियो की मिलीभगत से खारिज कर बंदरबांट कर लिया जाता है। श्री पांडेय ने इसकी जांच कराने और मखौड़ा मंदिर में व्याप्त अनियमितता हेतु वीडियो पर कार्यवाही सुनिश्चित कराने का प्रस्ताव भी रखा। श्री पांडेय ने कहा कि उनके संघर्ष के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रयासों से कुछ वर्ष पूर्व कहीं-कहीं घाटों का निर्माण और आंशिक सफाई हुई थी, लेकिन आज वहां भी व्यापक गंदगी व्याप्त है। उन्होंने दुख व्यक्त किया कि इतने पौराणिक स्थल पर न तो आज तक दिव्य भव्य मंदिर बन सका और न ही सौंदर्यीकरण हो पाया। उन्होंने जनता से इस बदहाली के विरुद्ध लामबंद होने का आह्वान किया, ताकि मनोरमा की सफाई और इन पौराणिक स्थलों का विकास हो सके। श्री पांडेय ने जोर दिया कि नदी स्वच्छ होगी तो लोग स्वस्थ रहेंगे और दवा पर खर्च होने वाले धन की बचत होगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन नदियों को साफ नहीं कराता है तो उन्हें ‘आर-पार’ का संघर्ष करना पड़ेगा।











































