बहराइच जिले की महसी तहसील में तैनात एसडीएम आलोक प्रसाद के खिलाफ अधिवक्ताओं का विरोध प्रदर्शन जारी है। तीन महीने से एसडीएम कोर्ट का बहिष्कार कर रहे अधिवक्ता लगातार तीसरे दिन एसडीएम कार्यालय का घेराव करते हुए सड़क पर उतरे और नारेबाजी की। बार एसोसिएशन महसी ने शासन को भेजे पत्र में एसडीएम आलोक प्रसाद पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पत्र में लिखा गया है कि एसडीएम कट्टर जातिवादी मानसिकता रखते हैं और टीका-चंदन लगाए वादकारियों को ‘गुंडा, पापी, चोर’ जैसे शब्दों से संबोधित करते हैं। उन पर अधिवक्ताओं के लगातार अपमान और उत्पीड़न का भी आरोप है। अधिवक्ताओं ने एसडीएम आलोक प्रसाद के मानसिक इलाज के साथ उनके शीघ्र स्थानांतरण की मांग की है। उनका आरोप है कि एसडीएम का व्यवहार अधिवक्ताओं और फरियादियों के प्रति अनुकूल नहीं है, और वे लगातार अपमानजनक शब्दों का प्रयोग करते हैं। अधिवक्ताओं ने प्रस्ताव पारित किया है कि यदि एसडीएम आलोक प्रसाद का स्थानांतरण नहीं होता है, तो वे 28 जनवरी से धरना प्रदर्शन शुरू करेंगे। उन्होंने पहले भी एसडीएम के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर उनके स्थानांतरण की मांग की थी और अपना आंदोलन जारी रखने की बात कही है। यह मामला केवल अधिवक्ताओं तक सीमित नहीं है। एसडीएम आलोक प्रसाद के कथित अमर्यादित व्यवहार के कारण जनपद का होमगार्ड संगठन भी 2 जनवरी से ड्यूटी तोड़कर धरना प्रदर्शन का ऐलान कर चुका है। परशुराम सेना और सवर्ण आर्मी जैसे संगठन भी होमगार्डों के समर्थन में मैदान में आ गए हैं, जिससे यह मुद्दा क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। एसडीएम पर लगे इन गंभीर आरोपों के बावजूद शासन द्वारा मामले का संज्ञान न लेने पर सवाल उठ रहे हैं। चोटी पकड़कर पटकने और जूते से मारने के होमगार्ड्स के आरोपों के बाद अब चंदन-टीका वालों को चोर, पापी, गुंडा कहने के आरोप, क्षेत्र में अप्रिय स्थिति पैदा कर सकते हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए शासन से हस्तक्षेप की अपेक्षा है।
SDM महसी के खिलाफ अधिवक्ताओं का प्रदर्शन: जातिवादी सोच, दुर्व्यवहार का आरोप, स्थानांतरण की मांग – Mahsi News
बहराइच जिले की महसी तहसील में तैनात एसडीएम आलोक प्रसाद के खिलाफ अधिवक्ताओं का विरोध प्रदर्शन जारी है। तीन महीने से एसडीएम कोर्ट का बहिष्कार कर रहे अधिवक्ता लगातार तीसरे दिन एसडीएम कार्यालय का घेराव करते हुए सड़क पर उतरे और नारेबाजी की। बार एसोसिएशन महसी ने शासन को भेजे पत्र में एसडीएम आलोक प्रसाद पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पत्र में लिखा गया है कि एसडीएम कट्टर जातिवादी मानसिकता रखते हैं और टीका-चंदन लगाए वादकारियों को ‘गुंडा, पापी, चोर’ जैसे शब्दों से संबोधित करते हैं। उन पर अधिवक्ताओं के लगातार अपमान और उत्पीड़न का भी आरोप है। अधिवक्ताओं ने एसडीएम आलोक प्रसाद के मानसिक इलाज के साथ उनके शीघ्र स्थानांतरण की मांग की है। उनका आरोप है कि एसडीएम का व्यवहार अधिवक्ताओं और फरियादियों के प्रति अनुकूल नहीं है, और वे लगातार अपमानजनक शब्दों का प्रयोग करते हैं। अधिवक्ताओं ने प्रस्ताव पारित किया है कि यदि एसडीएम आलोक प्रसाद का स्थानांतरण नहीं होता है, तो वे 28 जनवरी से धरना प्रदर्शन शुरू करेंगे। उन्होंने पहले भी एसडीएम के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर उनके स्थानांतरण की मांग की थी और अपना आंदोलन जारी रखने की बात कही है। यह मामला केवल अधिवक्ताओं तक सीमित नहीं है। एसडीएम आलोक प्रसाद के कथित अमर्यादित व्यवहार के कारण जनपद का होमगार्ड संगठन भी 2 जनवरी से ड्यूटी तोड़कर धरना प्रदर्शन का ऐलान कर चुका है। परशुराम सेना और सवर्ण आर्मी जैसे संगठन भी होमगार्डों के समर्थन में मैदान में आ गए हैं, जिससे यह मुद्दा क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। एसडीएम पर लगे इन गंभीर आरोपों के बावजूद शासन द्वारा मामले का संज्ञान न लेने पर सवाल उठ रहे हैं। चोटी पकड़कर पटकने और जूते से मारने के होमगार्ड्स के आरोपों के बाद अब चंदन-टीका वालों को चोर, पापी, गुंडा कहने के आरोप, क्षेत्र में अप्रिय स्थिति पैदा कर सकते हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए शासन से हस्तक्षेप की अपेक्षा है।






































