बहराइच में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में एक भव्य हिंदू सम्मेलन आयोजित किया गया। यह सम्मेलन चितौरा खंड के कल्पीपारा मंडल स्थित आवास विकास कॉलोनी, भिनगा रोड पर संपन्न हुआ। सम्मेलन में अनंतविभूति स्वामी विष्णुदेवाचार्य महाराज मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। अवध प्रांत के प्रांत प्रचार टोली सदस्य उमेश जी मुख्य वक्ता थे, जबकि डॉ. श्वेता जैन ने मातृशक्ति का प्रतिनिधित्व किया। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन और भारत माता के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। अपने संबोधन में स्वामी विष्णुदेवाचार्य ने कहा कि संघ अपना शताब्दी वर्ष मना रहा है और सभी को ‘पंच परिवर्तन’ को अपनी जीवनशैली में अपनाने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण का उल्लेख करते हुए कहा कि अब ऋषि बालार्क की तपोस्थली सूर्यकुंड को ‘विधर्मियों’ से मुक्त कराने का अभियान चलाना होगा, ताकि भगवान ब्रह्मा की इस तपोस्थली को पुनः पवित्र किया जा सके। मुख्य वक्ता उमेश जी ने बताया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पिछले 100 वर्षों से लगातार प्रत्येक हिंदू के चरित्र निर्माण का कार्य कर रहा है। उन्होंने हिंदू समाज में निरंतर जागरण की आवश्यकता पर बल दिया। उमेश जी ने कहा कि ‘विधर्मियों’ ने हमेशा हम पर वार किया है, क्योंकि हम ‘अहिंसा परमो धर्म’ के सिद्धांत का पालन करते हैं। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के शिकागो सम्मेलन के समय से ही हिंदुओं के चरित्र निर्माण पर किए गए कार्यों और जाति-पंथ की भावना से दूर रहने के उपदेश का स्मरण कराया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि स्वयंसेवक केवल संघ का ही नहीं होता, बल्कि राष्ट्र का कार्य निष्ठावान रूप से करने वाला प्रत्येक व्यक्ति स्वयंसेवक है।
बहराइच में हिंदू सम्मेलन आयोजित: संतों ने चरित्र निर्माण, सूर्यकुंड मुक्ति का आह्वान किया – Bahraich News
बहराइच में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में एक भव्य हिंदू सम्मेलन आयोजित किया गया। यह सम्मेलन चितौरा खंड के कल्पीपारा मंडल स्थित आवास विकास कॉलोनी, भिनगा रोड पर संपन्न हुआ। सम्मेलन में अनंतविभूति स्वामी विष्णुदेवाचार्य महाराज मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। अवध प्रांत के प्रांत प्रचार टोली सदस्य उमेश जी मुख्य वक्ता थे, जबकि डॉ. श्वेता जैन ने मातृशक्ति का प्रतिनिधित्व किया। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन और भारत माता के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। अपने संबोधन में स्वामी विष्णुदेवाचार्य ने कहा कि संघ अपना शताब्दी वर्ष मना रहा है और सभी को ‘पंच परिवर्तन’ को अपनी जीवनशैली में अपनाने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण का उल्लेख करते हुए कहा कि अब ऋषि बालार्क की तपोस्थली सूर्यकुंड को ‘विधर्मियों’ से मुक्त कराने का अभियान चलाना होगा, ताकि भगवान ब्रह्मा की इस तपोस्थली को पुनः पवित्र किया जा सके। मुख्य वक्ता उमेश जी ने बताया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पिछले 100 वर्षों से लगातार प्रत्येक हिंदू के चरित्र निर्माण का कार्य कर रहा है। उन्होंने हिंदू समाज में निरंतर जागरण की आवश्यकता पर बल दिया। उमेश जी ने कहा कि ‘विधर्मियों’ ने हमेशा हम पर वार किया है, क्योंकि हम ‘अहिंसा परमो धर्म’ के सिद्धांत का पालन करते हैं। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के शिकागो सम्मेलन के समय से ही हिंदुओं के चरित्र निर्माण पर किए गए कार्यों और जाति-पंथ की भावना से दूर रहने के उपदेश का स्मरण कराया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि स्वयंसेवक केवल संघ का ही नहीं होता, बल्कि राष्ट्र का कार्य निष्ठावान रूप से करने वाला प्रत्येक व्यक्ति स्वयंसेवक है।


































