बलरामपुर। मनरेगा बचाओ संग्राम कार्यक्रम के तहत 25 जनवरी 2026 दिन रविवार को दिन में 12:00 से लेकर शाम 6:00 तक विकासखंड श्रीदत्तगंज की चार ग्राम पंचायतों में कांग्रेस पार्टी द्वारा बैठकें आयोजित की गईं। इन बैठकों में केंद्र सरकार पर मनरेगा को कमजोर करने का आरोप लगाया गया और श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा की मांग की गई। ये बैठकें ग्राम पंचायत किठौर, फूलपुर, रामपुर बंजारा और ननमहारा में हुईं। इनका आयोजन पूर्व जिला पंचायत सदस्य तरुण और पिथौरा के पप्पू प्रधान ने किया था। कार्यक्रम जिला अध्यक्ष शिवलाल कोरी के नेतृत्व में संपन्न हुआ। बैठकों में ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी सदस्य राजबहादुर यादव, बजरंगी शुक्ला, कांग्रेसी नेता विशाल सहित कई कांग्रेस नेता और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। वक्ताओं ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मनरेगा में किए जा रहे संशोधन श्रमिकों के लिए धोखा हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार मनरेगा को कमजोर कर उसे समाप्त करने की ओर ले जा रही है, जिससे ग्रामीण श्रमिकों के रोजगार और अधिकारों पर सीधा असर पड़ रहा है। नेताओं ने मनरेगा को पूरी मजबूती के साथ लागू करने और श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा की मांग की। बैठक के दौरान ग्रामीणों ने भी मनरेगा से जुड़ी अपनी समस्याओं को सामने रखा। इनमें कार्य की उपलब्धता में कमी, मजदूरी भुगतान में देरी और योजना में पारदर्शिता का अभाव जैसी शिकायतें शामिल थीं।
श्रीदत्तगंज ब्लॉक में कांग्रेस की बैठक:केंद्र सरकार पर मनरेगा कमजोर करने का आरोप, श्रमिकों के अधिकारों की मांग
बलरामपुर। मनरेगा बचाओ संग्राम कार्यक्रम के तहत 25 जनवरी 2026 दिन रविवार को दिन में 12:00 से लेकर शाम 6:00 तक विकासखंड श्रीदत्तगंज की चार ग्राम पंचायतों में कांग्रेस पार्टी द्वारा बैठकें आयोजित की गईं। इन बैठकों में केंद्र सरकार पर मनरेगा को कमजोर करने का आरोप लगाया गया और श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा की मांग की गई। ये बैठकें ग्राम पंचायत किठौर, फूलपुर, रामपुर बंजारा और ननमहारा में हुईं। इनका आयोजन पूर्व जिला पंचायत सदस्य तरुण और पिथौरा के पप्पू प्रधान ने किया था। कार्यक्रम जिला अध्यक्ष शिवलाल कोरी के नेतृत्व में संपन्न हुआ। बैठकों में ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी सदस्य राजबहादुर यादव, बजरंगी शुक्ला, कांग्रेसी नेता विशाल सहित कई कांग्रेस नेता और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। वक्ताओं ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मनरेगा में किए जा रहे संशोधन श्रमिकों के लिए धोखा हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार मनरेगा को कमजोर कर उसे समाप्त करने की ओर ले जा रही है, जिससे ग्रामीण श्रमिकों के रोजगार और अधिकारों पर सीधा असर पड़ रहा है। नेताओं ने मनरेगा को पूरी मजबूती के साथ लागू करने और श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा की मांग की। बैठक के दौरान ग्रामीणों ने भी मनरेगा से जुड़ी अपनी समस्याओं को सामने रखा। इनमें कार्य की उपलब्धता में कमी, मजदूरी भुगतान में देरी और योजना में पारदर्शिता का अभाव जैसी शिकायतें शामिल थीं।





































