8 साल से बच्चों के हक पर डाका:श्रावस्ती की 'हॉट कुक्ड योजना' में घोटाले के गंभीर आरोप, कोर्ट जाने की चेतावनी

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श्रावस्ती में बच्चों को गर्म भोजन उपलब्ध कराने वाली ‘हॉट कुक्ड योजना’ में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता, गबन के आरोप लगे हैं। लोक जनशक्ति पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष मनोज पाठक ने एक माह पूर्व इसकी शिकायत की थी। उन्होंने निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। पाठक ने कहा कि यदि 15 दिन में कार्रवाई नहीं हुई तो वे न्यायालय का रुख करेंगे। मनोज पाठक के अनुसार, महिला एवं बाल विकास विभाग ने वर्ष 2018 में जिले के 926 आंगनबाड़ी केंद्रों पर यह योजना लागू की थी।इसके तहत 3 से 6 वर्ष के बच्चों को प्रतिदिन गर्म भोजन उपलब्ध कराने के लिए प्रति बच्चा 8.50 रुपये की दर से धनराशि प्रधान और आंगनबाड़ी कार्यकत्री के संयुक्त खाते में भेजी जाती थी। योजना के नियमों के अनुसार, 8.50 रुपये में से 7 रुपये भोजन सामग्री पर,1 रुपया रसोइया के पारिश्रमिक के रूप में और 50 पैसे आंगनबाड़ी सहायिका को दिए जाने थे। आरोप है कि योजना लागू होने के आठ वर्ष बाद भी रसोइयों और सहायिकाओं को उनका निर्धारित पारिश्रमिक नहीं मिला है।मनोज पाठक ने सवाल उठाया है कि जब भुगतान नहीं हुआ, तो योजना का संचालन कैसे होता रहा। पाठक ने आरोप लगाया है कि जिला कार्यक्रम अधिकारी (डीपीओ) की मिलीभगत से इस योजना में बड़े पैमाने पर धन का गबन किया गया। उनके अनुसार, यह अकेले किसी एक व्यक्ति का काम नहीं हो सकता, इसमें कई लोग शामिल हैं। मनोज पाठक ने बताया कि 17 जनवरी को इस मामले की जांच के लिए एक समिति गठित की गई थी। हालांकि, एक महीने बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। उन्होंने पुनः चेतावनी दी है कि यदि 15 दिन के भीतर डीपीओ पर कार्रवाई नहीं हुई तो वे न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे। शिकायतकर्ता का दावा है कि आरोप सामने आने के बाद अब कुछ आंगनबाड़ी केंद्रों पर भोजन बनना शुरू हुआ है। इससे यह सवाल उठता है कि पिछले आठ वर्षों तक विभागीय अधिकारी क्या कर रहे थे। बच्चों के पोषण से जुड़ी इस महत्वपूर्ण योजना में अनियमितता के आरोपों ने जिम्मेदारो की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है।
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