
उत्तर प्रदेश पुलिस के ‘ऑपरेशन कनविक्शन’ अभियान के तहत श्रावस्ती में एक महत्वपूर्ण सफलता मिली है। विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो) न्यायालय ने हाल ही में नाबालिग लड़की को बहला-फुसलाकर भगाने और दुष्कर्म के मामले में दो अभियुक्तों को पांच-पांच साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। प्रत्येक दोषी पर 35,000 रुपए का अर्थदंड भी लगाया गया है। यह मामला थाना सिरसिया में केस दर्ज किया गया था। आरोपियों की पहचान राम प्रसाद पुत्र प्रकाश अहिरवार और उसकी पत्नी के रूप में हुई है, जो मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के नारायणपुर, थाना आरोक्षा के निवासी हैं। न्यायालय ने पाया कि अभियुक्तों ने वादी की नाबालिग बेटी को शादी के इरादे से बहला-फुसलाकर भगाया और उसके साथ दुष्कर्म किया। पुलिस अधीक्षक राहुल भाटी के निर्देश पर महिला संबंधी गंभीर अपराधों में प्रभावी पैरवी सुनिश्चित की गई। मॉनिटरिंग सेल, विशेष लोक अभियोजक, संयुक्त निदेशक अभियोजन, शासकीय अधिवक्ता और कोर्ट पैरोकारों के समन्वित प्रयासों से इस प्रकरण का त्वरित और प्रभावी निस्तारण संभव हो सका। कोर्ट ASj SPL POCSO ने 26. फरवरी को दोनों आरोपियों को दोषी ठहराया। साक्ष्यों और सशक्त पैरवी के आधार पर यह निर्णय लिया गया। कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि अर्थदंड अदा न करने की स्थिति में दोषियों को अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। इस फैसले से न केवल पीड़िता को न्याय मिला है, बल्कि समाज में भी यह संदेश गया है कि महिला एवं बाल अपराधों के प्रति पुलिस और न्यायालय की कार्रवाई कठोर एवं प्रभावी है। पुलिस अधीक्षक राहुल भाटी ने बताया कि महिला एवं बालिकाओं से संबंधित अपराधों में दोषियों को सख्त सजा दिलाना उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने आश्वासन दिया कि भविष्य में भी ऐसे मामलों में प्रभावी विवेचना और सशक्त पैरवी सुनिश्चित कर अपराधियों को कठोर दंड दिलाया जाएगा।

































