हरैया सतघरवा में सिंहपुर गांव स्थित हनुमान मंदिर पर चल रहे सात दिवसीय शतचंडी महायज्ञ एवं संत सम्मेलन में शनिवार को अयोध्या धाम से आए संतों ने श्रद्धालुओं को धर्म और भक्ति का महत्व बताया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। अयोध्या धाम से पधारे संत सत्यस्वरूपानन्द महाराज ने कहा कि गृहस्थ आश्रम में रहकर भी भगवान की भक्ति, माता-पिता, गुरु और गो-सेवा करना प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि गो-सेवा से मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है। संत ने कहा कि जब-जब धर्म की हानि होती है, तब-तब भगवान अवतार लेते हैं। भगवान की कथा सुनने से मनुष्य के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। उन्होंने गोस्वामी तुलसीदास महाराज की चौपाई का उल्लेख करते हुए कहा— “बड़े भाग्य मानुष तन पावा, सुर दुर्लभ यह ग्रंथहि गावा।” इसका अर्थ है कि मनुष्य का शरीर बड़े सौभाग्य से मिलता है और मानव रूप में जन्म लेने के लिए देवता भी लालायित रहते हैं। शतचंडी महायज्ञ एवं संत सम्मेलन में अयोध्या धाम से आए आचार्य शिवराम शास्त्री, संत रामदास महाराज, वंदना रमायणी, अशोकानंद महाराज, संत बजरंगी दास, साहब दास, जमुना दास, सूरदास, भंडारी दास, महंत सत्य प्रकाश दास, महंत शांति दास, राममोहन, संत पूनम दासी, राकेश तिवारी, दीनबंधु तिवारी, सिपाही लाल, मनमोहन तिवारी, कल्लू दास और कन्हैया दास सहित अनेक संत-महात्मा उपस्थित रहे।
"बड़े भाग्य मानुष तन पावा, सुर दुर्लभ यह ग्रंथहि गावा':सिंहपुर में संत सत्यस्वरूपानन्द महाराज बोले- गुरु और गो-सेवा करना प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य
हरैया सतघरवा में सिंहपुर गांव स्थित हनुमान मंदिर पर चल रहे सात दिवसीय शतचंडी महायज्ञ एवं संत सम्मेलन में शनिवार को अयोध्या धाम से आए संतों ने श्रद्धालुओं को धर्म और भक्ति का महत्व बताया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। अयोध्या धाम से पधारे संत सत्यस्वरूपानन्द महाराज ने कहा कि गृहस्थ आश्रम में रहकर भी भगवान की भक्ति, माता-पिता, गुरु और गो-सेवा करना प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि गो-सेवा से मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है। संत ने कहा कि जब-जब धर्म की हानि होती है, तब-तब भगवान अवतार लेते हैं। भगवान की कथा सुनने से मनुष्य के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। उन्होंने गोस्वामी तुलसीदास महाराज की चौपाई का उल्लेख करते हुए कहा— “बड़े भाग्य मानुष तन पावा, सुर दुर्लभ यह ग्रंथहि गावा।” इसका अर्थ है कि मनुष्य का शरीर बड़े सौभाग्य से मिलता है और मानव रूप में जन्म लेने के लिए देवता भी लालायित रहते हैं। शतचंडी महायज्ञ एवं संत सम्मेलन में अयोध्या धाम से आए आचार्य शिवराम शास्त्री, संत रामदास महाराज, वंदना रमायणी, अशोकानंद महाराज, संत बजरंगी दास, साहब दास, जमुना दास, सूरदास, भंडारी दास, महंत सत्य प्रकाश दास, महंत शांति दास, राममोहन, संत पूनम दासी, राकेश तिवारी, दीनबंधु तिवारी, सिपाही लाल, मनमोहन तिवारी, कल्लू दास और कन्हैया दास सहित अनेक संत-महात्मा उपस्थित रहे।




































