श्रावस्ती जिले में यूजीसी की नई गाइडलाइंस के विरोध में सियासी हलचल तेज हो गई है। इसका असर अब राजनीतिक दलों के भीतर भी दिखाई दे रहा है। ब्राह्मण समाज पहले ही इन गाइडलाइंस का विरोध कर चुका है, और अब भाजपा के कुछ पदाधिकारी भी इस्तीफा देना शुरू कर दिये है। इसी क्रम में, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) शिक्षक प्रकोष्ठ के जिला संयोजक राजकिशोर पांडेय ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए राजकिशोर पांडेय ने कहा कि यूजीसी की नई गाइडलाइंस सवर्ण समाज के लिए ‘घातक’ साबित होंगी। उन्होंने तर्क दिया कि सवर्ण भी भारत के नागरिक हैं और राष्ट्र सेवा में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। ऐसे में यूजीसी द्वारा इस तरह का कानून लागू करना ‘समझ से बाहर’ है। पांडेय ने यह भी आरोप लगाया कि इस कानून के दुरुपयोग की आशंका से सामान्य वर्ग के लोग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि सवर्ण समाज का कोई व्यक्ति किसी दलित से कुछ कह दे या उसकी तरफ देख भी ले, तो तुरंत मुकदमा दर्ज कर दिया जाएगा और सामान्य वर्ग की सुनवाई नहीं होगी, जिससे वे ‘आहत’ हैं। राजकिशोर पांडेय ने पार्टी नेतृत्व पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पार्टी के शीर्ष नेता इस मुद्दे पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। उन्होंने त्यागपत्र देने का कारण बताते हुए कहा कि यदि यूजीसी की गाइडलाइंस को वापस नहीं लिया गया, तो केवल ब्राह्मण ही नहीं, बल्कि पूरा सवर्ण समाज पार्टी से दूरी बना लेगा। इस पूरे मामले पर भाजपा जिला संगठन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।





































