हर्रैया में यूजीसी एक्ट-2026 के प्रावधानों में विसंगतियों और सामान्य वर्ग के छात्रों के हितों की अनदेखी के विरोध में मंगलवार को छात्रों और युवाओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने प्रदर्शन किया। मुरादीपुर से हर्रैया बाजार तक रैली निकालने के बाद प्रतिनिधिमंडल ने तहसील परिसर पहुंचकर उपजिलाधिकारी हर्रैया सत्येंद्र सिंह को ज्ञापन सौंपा। रैली के दौरान छात्रों में यूजीसी एक्ट को लेकर गहरी नाराजगी देखी गई। प्रदर्शनकारियों ने ‘मोदी तेरी तानाशाही, नहीं चलेगी’, ‘यूजीसी एक्ट काला कानून वापस लो’, और ‘ये तो एक झांकी है, तूफान आना बाकी है’ जैसे नारे लगाए। ज्ञापन के माध्यम से उच्च शिक्षा व्यवस्था में समानता, योग्यता (मेरिट) और संवैधानिक संतुलन बनाए रखने की मांग की गई। छात्रों का कहना था कि एक्ट के कुछ प्रावधान शिक्षा में समान अवसर की मूल भावना को प्रभावित करते हैं। प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि इससे सामान्य वर्ग के छात्रों में असुरक्षा और मानसिक दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत में पहले से ही भारतीय न्याय संहिता, दंड प्रक्रिया संहिता और एंटी-रैगिंग नियम जैसे कई कानून मौजूद हैं, जो किसी भी प्रकार के भेदभाव या उत्पीड़न के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करते हैं। छात्रों ने आरोप लगाया कि नए अधिनियम के तहत कुछ नियम एकतरफा हैं, जिससे किसी विशेष वर्ग को पूर्वाग्रह के आधार पर दोषी माना जा सकता है। यह संविधान की समानता और न्याय की भावना के विपरीत है। उन्होंने आशंका जताई कि यदि इन प्रावधानों की निष्पक्ष समीक्षा नहीं की गई, तो इसका शिक्षा के वातावरण और छात्रों के मनोबल पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। ज्ञापन में चार प्रमुख मांगें रखी गईं। इनमें यूजीसी एक्ट-2026 की निष्पक्ष समीक्षा, शिक्षा व्यवस्था में योग्यता और समानता सुनिश्चित करना, सभी वर्गों पर समान कानून लागू करना और झूठे आरोपों से छात्रों की सुरक्षा के लिए स्पष्ट व प्रभावी प्रावधान करना शामिल है। प्रतिनिधिमंडल में दीपांशु सिन्हा, विकास सिंह, हर्षवर्धन सिंह, संजय, हरिओम पाण्डेय, जय सिंह और शरद पाण्डेय शामिल थे। उपजिलाधिकारी सत्येंद्र सिंह ने ज्ञापन को गंभीरता से लेते हुए इसे उच्चाधिकारियों को भेजने का आश्वासन दिया।





































