तुलसीपुर शिक्षा क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय करौदां में शैक्षणिक व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित है। विद्यालय के प्रधानाचार्य 16 जनवरी से लगातार अनुपस्थित हैं, जिसके कारण विद्यालय संचालन की जिम्मेदारी एकमात्र कार्यरत शिक्षामित्र पर आ गई है। प्रधानाचार्य की अनुपस्थिति का सबसे अधिक प्रभाव मध्यान्ह भोजन योजना (एमडीएम) पर पड़ा है, जो 16 जनवरी से पूरी तरह बंद है। विद्यालय में वर्तमान में केवल शिक्षामित्र मीरा देवी कार्यरत हैं, जिनके भरोसे पठन-पाठन किसी तरह संचालित हो रहा है। एमडीएम बंद होने के कारण छात्र-छात्राओं को खाली पेट घर लौटना पड़ रहा है, जिससे बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण को लेकर अभिभावकों में चिंता बढ़ गई है। शिक्षामित्र मीरा देवी ने बुधवार को बताया कि उन्होंने प्रधानाचार्य से मोबाइल फोन के माध्यम से कई बार संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन उनसे कोई संपर्क नहीं हो सका। प्रधानाचार्य विद्यालय से पूरी तरह कटे हुए हैं। इस संबंध में विभागीय अधिकारियों को लगातार सूचना दी जा रही है, लेकिन अभी तक कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है। अभिभावकों का कहना है कि शासन द्वारा बच्चों की शिक्षा और पोषण के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों और प्रधानाचार्य की लापरवाही के कारण बच्चों को इन योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। एमडीएम बंद होने से बच्चों की नियमित उपस्थिति भी प्रभावित हो रही है। इस मामले पर खंड शिक्षा अधिकारी स्वामीनाथ आर्य ने बताया कि प्रधानाचार्य की लगातार अनुपस्थिति की सूचना विभाग को प्राप्त हो रही है। इसे गंभीरता से लेते हुए प्रधानाचार्य का वेतन रोक दिया गया है और उनके विरुद्ध अन्य विभागीय कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है। उन्होंने आश्वासन दिया कि बच्चों के हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और शीघ्र ही विद्यालय में शैक्षणिक तथा एमडीएम व्यवस्था को सुचारु किया जाएगा। विद्यालय में व्याप्त इस अव्यवस्था ने प्राथमिक शिक्षा तंत्र की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
तुलसीपुर में विद्यालय प्रधानाचार्य 16 जनवरी से अनुपस्थित:विद्यालय व्यवस्था चरमराई, एमडीएम बंद, वेतन भी रुका
तुलसीपुर शिक्षा क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय करौदां में शैक्षणिक व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित है। विद्यालय के प्रधानाचार्य 16 जनवरी से लगातार अनुपस्थित हैं, जिसके कारण विद्यालय संचालन की जिम्मेदारी एकमात्र कार्यरत शिक्षामित्र पर आ गई है। प्रधानाचार्य की अनुपस्थिति का सबसे अधिक प्रभाव मध्यान्ह भोजन योजना (एमडीएम) पर पड़ा है, जो 16 जनवरी से पूरी तरह बंद है। विद्यालय में वर्तमान में केवल शिक्षामित्र मीरा देवी कार्यरत हैं, जिनके भरोसे पठन-पाठन किसी तरह संचालित हो रहा है। एमडीएम बंद होने के कारण छात्र-छात्राओं को खाली पेट घर लौटना पड़ रहा है, जिससे बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण को लेकर अभिभावकों में चिंता बढ़ गई है। शिक्षामित्र मीरा देवी ने बुधवार को बताया कि उन्होंने प्रधानाचार्य से मोबाइल फोन के माध्यम से कई बार संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन उनसे कोई संपर्क नहीं हो सका। प्रधानाचार्य विद्यालय से पूरी तरह कटे हुए हैं। इस संबंध में विभागीय अधिकारियों को लगातार सूचना दी जा रही है, लेकिन अभी तक कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है। अभिभावकों का कहना है कि शासन द्वारा बच्चों की शिक्षा और पोषण के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों और प्रधानाचार्य की लापरवाही के कारण बच्चों को इन योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। एमडीएम बंद होने से बच्चों की नियमित उपस्थिति भी प्रभावित हो रही है। इस मामले पर खंड शिक्षा अधिकारी स्वामीनाथ आर्य ने बताया कि प्रधानाचार्य की लगातार अनुपस्थिति की सूचना विभाग को प्राप्त हो रही है। इसे गंभीरता से लेते हुए प्रधानाचार्य का वेतन रोक दिया गया है और उनके विरुद्ध अन्य विभागीय कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है। उन्होंने आश्वासन दिया कि बच्चों के हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और शीघ्र ही विद्यालय में शैक्षणिक तथा एमडीएम व्यवस्था को सुचारु किया जाएगा। विद्यालय में व्याप्त इस अव्यवस्था ने प्राथमिक शिक्षा तंत्र की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।









































