डुमरियागंज नगर पंचायत के वार्ड संख्या 10 महाराजा अग्रसेननगर में श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। कथा के पांचवें दिन काशी धाम से पधारे कथावाचक स्वामी दिनेशानंद महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, ब्रह्मा के मोह और गोवर्धन पूजा प्रसंग का वर्णन किया। कथावाचक स्वामी दिनेशानंद महाराज ने श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान की लीलाएं मानव जीवन के लिए सदैव प्रेरणादायक होती हैं। बाल कृष्ण की नटखट अदाओं और माखन चोरी की कथाओं ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। उन्होंने बताया कि नटखट स्वभाव के कारण माता यशोदा के पास प्रतिदिन श्रीकृष्ण की शिकायतें आती थीं। जब माता उनसे माखन चोरी का आरोप लगातीं, तो बाल कृष्ण तुरंत अपना मुख खोलकर यह दर्शाते कि उन्होंने माखन नहीं खाया है। इसके बाद स्वामी जी ने गोवर्धन पूजा प्रसंग का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि काफी विचार-विमर्श के बाद श्रीकृष्ण की बात मानी गई और व्रज में गोवर्धन पूजा की परंपरा प्रारंभ हुई। कथा के दौरान पूरा पंडाल भक्ति रस से सराबोर रहा और श्रद्धालु भावविभोर होकर भगवान श्रीकृष्ण के जयकारे लगाते रहे। इस अवसर पर मुख्य यजमान धर्मात्मा कसौधन, कमला देवी सहित पंकज गिरि, पंडित राकेश शास्त्री, नंदकिशोर, विनोद, संगमलाल, राजेश, आशीष उर्फ पींटू, अनुराग, अंकित, जतिन, नितिन, क्रिश, अर्नव, अंशुमन, अयांश, प्रेमचंद्र, रामभरत, चंद्रभान अग्रहरि, सतीश श्रीवास्तव, जनार्दन और विक्की समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
भागवत कथा के पांचवें दिन बाल लीलाओं का वर्णन:गोवर्धन पूजा प्रसंग से पंडाल भक्तिमय हुआ
डुमरियागंज नगर पंचायत के वार्ड संख्या 10 महाराजा अग्रसेननगर में श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। कथा के पांचवें दिन काशी धाम से पधारे कथावाचक स्वामी दिनेशानंद महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, ब्रह्मा के मोह और गोवर्धन पूजा प्रसंग का वर्णन किया। कथावाचक स्वामी दिनेशानंद महाराज ने श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान की लीलाएं मानव जीवन के लिए सदैव प्रेरणादायक होती हैं। बाल कृष्ण की नटखट अदाओं और माखन चोरी की कथाओं ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। उन्होंने बताया कि नटखट स्वभाव के कारण माता यशोदा के पास प्रतिदिन श्रीकृष्ण की शिकायतें आती थीं। जब माता उनसे माखन चोरी का आरोप लगातीं, तो बाल कृष्ण तुरंत अपना मुख खोलकर यह दर्शाते कि उन्होंने माखन नहीं खाया है। इसके बाद स्वामी जी ने गोवर्धन पूजा प्रसंग का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि काफी विचार-विमर्श के बाद श्रीकृष्ण की बात मानी गई और व्रज में गोवर्धन पूजा की परंपरा प्रारंभ हुई। कथा के दौरान पूरा पंडाल भक्ति रस से सराबोर रहा और श्रद्धालु भावविभोर होकर भगवान श्रीकृष्ण के जयकारे लगाते रहे। इस अवसर पर मुख्य यजमान धर्मात्मा कसौधन, कमला देवी सहित पंकज गिरि, पंडित राकेश शास्त्री, नंदकिशोर, विनोद, संगमलाल, राजेश, आशीष उर्फ पींटू, अनुराग, अंकित, जतिन, नितिन, क्रिश, अर्नव, अंशुमन, अयांश, प्रेमचंद्र, रामभरत, चंद्रभान अग्रहरि, सतीश श्रीवास्तव, जनार्दन और विक्की समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।





































