डुमरियागंज विकास खंड के ग्राम सोनाहटी में स्वच्छ भारत अभियान के दावों के विपरीत एक गंभीर स्थिति सामने आई है। गांव के मुख्य मार्ग और रिहायशी इलाके के पास कूड़े का विशाल ढेर जमा हो गया है, जो राहगीरों के लिए परेशानी और स्थानीय निवासियों के स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बन गया है। यह स्थिति स्थानीय प्रशासन और ग्राम पंचायत की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती है। मुख्य मार्ग के किनारे प्लास्टिक और अन्य अपशिष्ट पदार्थों का जमावड़ा लगा है। उचित निस्तारण व्यवस्था न होने के कारण यहां से गुजरने वाले लोगों को लगातार दुर्गंध का सामना करना पड़ रहा है। तस्वीर में स्पष्ट है कि कूड़े के ढेर के ठीक पास एक खराब हैंडपंप भी स्थित है। कचरे से रिसने वाला गंदा पानी भूजल को दूषित कर सकता है, जिससे हैजा और टाइफाइड जैसी बीमारियों के फैलने की आशंका बढ़ गई है। स्थानीय राहगीरों और निवासियों, जिनमें राम सरन, सजीवन, मनोज, शाहनवाज अली और मुबारक शामिल हैं, ने बताया कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद सफाई व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हुआ है। उनका कहना है कि आवारा पशु इस कचरे को सड़क पर फैला देते हैं, जिससे दुर्घटनाओं का डर बना रहता है। यह स्थिति विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों के लिए बेहद खतरनाक है। निवासियों ने अपनी निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि एक तरफ हम डिजिटल इंडिया और आधुनिक गांवों की बात करते हैं, वहीं दूसरी तरफ बुनियादी साफ-सफाई के लिए हमें तरसना पड़ रहा है। ग्राम सोनाहटी की यह स्थिति प्रशासनिक उदासीनता का एक स्पष्ट उदाहरण है। यदि समय रहते कूड़ा निस्तारण की उचित व्यवस्था नहीं की गई और पेयजल स्रोतों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की गई, तो यह गांव किसी बड़ी महामारी की चपेट में आ सकता है।
डुमरियागंज के सोनाहटी में गंदगी का ढेर:मुख्य मार्ग पर जमा कचरा, स्वास्थ्य और राहगीरों के लिए खतरा
डुमरियागंज विकास खंड के ग्राम सोनाहटी में स्वच्छ भारत अभियान के दावों के विपरीत एक गंभीर स्थिति सामने आई है। गांव के मुख्य मार्ग और रिहायशी इलाके के पास कूड़े का विशाल ढेर जमा हो गया है, जो राहगीरों के लिए परेशानी और स्थानीय निवासियों के स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बन गया है। यह स्थिति स्थानीय प्रशासन और ग्राम पंचायत की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती है। मुख्य मार्ग के किनारे प्लास्टिक और अन्य अपशिष्ट पदार्थों का जमावड़ा लगा है। उचित निस्तारण व्यवस्था न होने के कारण यहां से गुजरने वाले लोगों को लगातार दुर्गंध का सामना करना पड़ रहा है। तस्वीर में स्पष्ट है कि कूड़े के ढेर के ठीक पास एक खराब हैंडपंप भी स्थित है। कचरे से रिसने वाला गंदा पानी भूजल को दूषित कर सकता है, जिससे हैजा और टाइफाइड जैसी बीमारियों के फैलने की आशंका बढ़ गई है। स्थानीय राहगीरों और निवासियों, जिनमें राम सरन, सजीवन, मनोज, शाहनवाज अली और मुबारक शामिल हैं, ने बताया कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद सफाई व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हुआ है। उनका कहना है कि आवारा पशु इस कचरे को सड़क पर फैला देते हैं, जिससे दुर्घटनाओं का डर बना रहता है। यह स्थिति विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों के लिए बेहद खतरनाक है। निवासियों ने अपनी निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि एक तरफ हम डिजिटल इंडिया और आधुनिक गांवों की बात करते हैं, वहीं दूसरी तरफ बुनियादी साफ-सफाई के लिए हमें तरसना पड़ रहा है। ग्राम सोनाहटी की यह स्थिति प्रशासनिक उदासीनता का एक स्पष्ट उदाहरण है। यदि समय रहते कूड़ा निस्तारण की उचित व्यवस्था नहीं की गई और पेयजल स्रोतों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की गई, तो यह गांव किसी बड़ी महामारी की चपेट में आ सकता है।





































