बहराइच जनपद ने कुष्ठ रोग नियंत्रण में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। महात्मा गांधी के निर्वाण दिवस 30 जनवरी को मनाए जाने वाले राष्ट्रीय कुष्ठ निवारण दिवस के अवसर पर, जनपद को प्रदेश स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है। यह सम्मान 23 जनवरी को लखनऊ में महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य द्वारा आयोजित इंडिकेटर-वार समीक्षा बैठक में प्रदान किया गया। यह उपलब्धि वर्षों की सतत निगरानी, समय पर पहचान, गुणवत्तापूर्ण उपचार और समुदाय आधारित हस्तक्षेपों का परिणाम है। इन प्रयासों से जनपद में कुष्ठ रोग का प्रसार प्रभावी ढंग से नियंत्रित हुआ है। जिला कुष्ठ परामर्शदाता डॉ. विनय श्रीवास्तव ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में जनपद में कुष्ठ रोग की स्थिति में निरंतर सुधार हुआ है। वर्ष 2022-23 में 214 नए रोगी और प्रसार दर 0.50 थी। 2023-24 में यह 252 रोगियों के साथ 0.59 रही। इसके बाद, 2024-25 में यह फिर घटकर 0.50 पर आ गई, और 2025-26 में 205 नए रोगियों के साथ प्रसार दर और कम होकर 0.43 पर पहुंच गई है। डॉ. श्रीवास्तव ने यह भी बताया कि एक समय जनपद की स्थिति चिंताजनक थी। वर्ष 2010-11 में 565 रोगी और प्रसार दर 1.81 थी, जो 2011-12 में 756 रोगी और 2.17 तथा 2012-13 में 774 रोगी और 2.09 तक पहुंच गई थी। हालांकि, अब समय पर पहचान, पूर्ण उपचार और संपर्कियों को पोस्ट एक्सपोज़र प्रोफाइलेक्सिस (PEP) देने से कुष्ठ रोग पर प्रभावी नियंत्रण संभव हुआ है। जिला कुष्ठ अधिकारी डॉ. पवन कुमार वर्मा ने जानकारी दी कि राष्ट्रीय कुष्ठ रोग उन्मूलन कार्यक्रम का लक्ष्य प्रति 10 हजार जनसंख्या पर नए रोगियों की संख्या को एक से कम करना है। इस दिशा में, जनपद में सभी नए कुष्ठ रोगियों के संपर्क में आने वालों को एकल खुराक रिफाम्पिसिन दी जा रही है, जिससे संक्रमण का फैलाव न्यूनतम स्तर पर है।
बहराइच कुष्ठ उन्मूलन में बना प्रदेश का मॉडल जिला: प्रदेश स्तरीय समीक्षा में जनपद को मिला प्रथम स्थान – Bahraich News
बहराइच जनपद ने कुष्ठ रोग नियंत्रण में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। महात्मा गांधी के निर्वाण दिवस 30 जनवरी को मनाए जाने वाले राष्ट्रीय कुष्ठ निवारण दिवस के अवसर पर, जनपद को प्रदेश स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है। यह सम्मान 23 जनवरी को लखनऊ में महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य द्वारा आयोजित इंडिकेटर-वार समीक्षा बैठक में प्रदान किया गया। यह उपलब्धि वर्षों की सतत निगरानी, समय पर पहचान, गुणवत्तापूर्ण उपचार और समुदाय आधारित हस्तक्षेपों का परिणाम है। इन प्रयासों से जनपद में कुष्ठ रोग का प्रसार प्रभावी ढंग से नियंत्रित हुआ है। जिला कुष्ठ परामर्शदाता डॉ. विनय श्रीवास्तव ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में जनपद में कुष्ठ रोग की स्थिति में निरंतर सुधार हुआ है। वर्ष 2022-23 में 214 नए रोगी और प्रसार दर 0.50 थी। 2023-24 में यह 252 रोगियों के साथ 0.59 रही। इसके बाद, 2024-25 में यह फिर घटकर 0.50 पर आ गई, और 2025-26 में 205 नए रोगियों के साथ प्रसार दर और कम होकर 0.43 पर पहुंच गई है। डॉ. श्रीवास्तव ने यह भी बताया कि एक समय जनपद की स्थिति चिंताजनक थी। वर्ष 2010-11 में 565 रोगी और प्रसार दर 1.81 थी, जो 2011-12 में 756 रोगी और 2.17 तथा 2012-13 में 774 रोगी और 2.09 तक पहुंच गई थी। हालांकि, अब समय पर पहचान, पूर्ण उपचार और संपर्कियों को पोस्ट एक्सपोज़र प्रोफाइलेक्सिस (PEP) देने से कुष्ठ रोग पर प्रभावी नियंत्रण संभव हुआ है। जिला कुष्ठ अधिकारी डॉ. पवन कुमार वर्मा ने जानकारी दी कि राष्ट्रीय कुष्ठ रोग उन्मूलन कार्यक्रम का लक्ष्य प्रति 10 हजार जनसंख्या पर नए रोगियों की संख्या को एक से कम करना है। इस दिशा में, जनपद में सभी नए कुष्ठ रोगियों के संपर्क में आने वालों को एकल खुराक रिफाम्पिसिन दी जा रही है, जिससे संक्रमण का फैलाव न्यूनतम स्तर पर है।





































