श्रावस्ती में केंद्र सरकार द्वारा पारित यूजीसी बिल के समर्थन में तहसील जमुनहा के अधिवक्ताओं ने आवाज बुलंद की है। अधिवक्ताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने उपजिलाधिकारी (एसडीएम) जमुनहा के माध्यम से राष्ट्रपति को एक ज्ञापन भेजा, जिसमें इस बिल को संविधानसम्मत और शिक्षा व्यवस्था के हित में बताया गया। तहसील जमुनहा अधिवक्ता संघ की ओर से सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि यूजीसी बिल पूरी तरह संविधान के अनुरूप है। इसके प्रावधान देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, सुदृढ़ और प्रभावी बनाएंगे। अधिवक्ताओं ने इसे न्याय और संविधान के हित में एक आवश्यक कदम करार दिया। अधिवक्ताओं का कहना है कि यह बिल शिक्षा क्षेत्र में व्याप्त विसंगतियों को दूर करने में सहायक होगा। यह शैक्षणिक संस्थानों की जवाबदेही और गुणवत्ता सुनिश्चित करेगा। ज्ञापन में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि राष्ट्रपति तक यह समर्थन पहुंचाना न्यायहित में आवश्यक है। बिल की संवैधानिक वैधता पर सवाल किए जाने पर अधिवक्ताओं ने कहा कि यह बिल केंद्र सरकार के विधायी अधिकारों के अंतर्गत आता है। यह संविधान के किसी भी प्रावधान का उल्लंघन नहीं करता है। छात्रों पर इसके प्रभाव के सवाल पर अधिवक्ताओं का मानना था कि यह बिल केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि उच्च शिक्षा में सुधार की दिशा में एक ठोस कदम है। स्थानीय स्तर से समर्थन पर अधिवक्ताओं ने कहा कि कानून और संविधान से जुड़े मुद्दों पर क्षेत्रीय सीमाएं बाधा नहीं बनतीं। इस ज्ञापन पर बीरबल वर्मा, जगतपाल यादव, ओम प्रकाश सोनी, यशवंत कुमार, सुखपाल मौर्य, अनवर अली, गुड्डू विश्वकर्मा, दिलीप कुमार यादव सहित 17 से अधिक अधिवक्ताओं ने हस्ताक्षर कर सामूहिक समर्थन दर्ज कराया। अधिवक्ता वर्ग का मानना है कि यूजीसी बिल भविष्य में शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और गुणवत्ता को बढ़ावा देगा। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राष्ट्रपति कार्यालय तक पहुंचा यह ज्ञापन देशभर में चल रही कानूनी और शैक्षणिक चर्चाओं को किस दिशा में आगे बढ़ाता है।





































