उतरौला क्षेत्र स्थित मदरसा जामिया अली हसन अहले सुन्नत में गुरुवार शाम सालाना जलसा-ए-दस्तारबंदी व अता-ए-रसूल कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। इस दौरान दीनी तालीम पूरी कर चुके कुल 87 छात्रों को दस्तार (साफा) बांधकर प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। कार्यक्रम का शुभारंभ मगरिब की नमाज के बाद कादरी मंच पर खत्म-ए-बुखारी शरीफ के साथ हुआ। ईशा की नमाज के उपरांत कारी मोहम्मद उमर की किराअत से जश्न-ए-दस्तारबंदी का आगाज किया गया। नात ख्वानों ने पैगम्बर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की शान में नात व मनकबत पेश की। मुख्य अतिथि सैयद खलीक अशरफ, मौलाना मोहम्मद हाशिम अशरफी कानपुरी, मौलाना डॉ. रूहुल अमीन तथा मदरसा प्रबंधक अबुल हसन खान अशरफी ने छात्रों को सम्मानित किया। इनमें 6 छात्रों को मुफ्ती, 30 को आलिम, 8 को फज़ीलत, 30 को दर्जा-ए-क़िराअत (कारी) तथा 13 छात्रों को हाफिज़-ए-कुरान की सनद दी गई। इसके अतिरिक्त, तीन श्रेष्ठ छात्रों गुलाम अशरफ, शमसुद्दीन और मोहम्मद आलम को नकद राशि व विशेष उपहार देकर सम्मानित किया गया। पूर्व में शब-ए-मेराज की बैठक में मुंहजबानी मुकम्मल कुरान सुनाने वाले सात छात्रों—मोहम्मद सईद रजा, नवाजिश हुसैन, मोहम्मद रेहान अंसारी, मोहम्मद अशहर, तौफीक रजा, मोहम्मद हस्सान रजा और मोहम्मद शहबाज खान—को प्रबंधक अबुल हसन खान अशरफी द्वारा ₹5100 की नकद राशि देकर सम्मानित किया गया था। मदरसा प्रबंधक अबुल हसन खान अशरफी ने इस अवसर पर कहा कि दीनी तालीम के साथ-साथ दुनियावी शिक्षा भी बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि मदरसा वर्ष 2007 से निरंतर अरबी-उर्दू के साथ हिंदी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान और कंप्यूटर की शिक्षा भी प्रदान कर रहा है। जलसा के सरपरस्त सैयद खलीक अशरफ ने मदरसा प्रबंधन की सराहना करते हुए इसे दीनी व सामाजिक विकास की मिसाल बताया। जलसे की सदारत प्रधानाचार्य मौलाना मुफ्ती महबूब आलम और निजामत मौलाना एजाज रजा हशमती ने की। कार्यक्रम का समापन मुल्क की तरक्की, अमन-ओ-अमान और खुशहाली की दुआ के साथ हुआ। इस अवसर पर बड़ी संख्या में उलेमा, गणमान्य लोग और क्षेत्रीय नागरिक मौजूद रहे।
उतरौला में मदरसा जामिया अली हसन में सालाना जलसा:87 छात्रों को दस्तारबंदी कर प्रमाण पत्र दिए गए
उतरौला क्षेत्र स्थित मदरसा जामिया अली हसन अहले सुन्नत में गुरुवार शाम सालाना जलसा-ए-दस्तारबंदी व अता-ए-रसूल कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। इस दौरान दीनी तालीम पूरी कर चुके कुल 87 छात्रों को दस्तार (साफा) बांधकर प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। कार्यक्रम का शुभारंभ मगरिब की नमाज के बाद कादरी मंच पर खत्म-ए-बुखारी शरीफ के साथ हुआ। ईशा की नमाज के उपरांत कारी मोहम्मद उमर की किराअत से जश्न-ए-दस्तारबंदी का आगाज किया गया। नात ख्वानों ने पैगम्बर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की शान में नात व मनकबत पेश की। मुख्य अतिथि सैयद खलीक अशरफ, मौलाना मोहम्मद हाशिम अशरफी कानपुरी, मौलाना डॉ. रूहुल अमीन तथा मदरसा प्रबंधक अबुल हसन खान अशरफी ने छात्रों को सम्मानित किया। इनमें 6 छात्रों को मुफ्ती, 30 को आलिम, 8 को फज़ीलत, 30 को दर्जा-ए-क़िराअत (कारी) तथा 13 छात्रों को हाफिज़-ए-कुरान की सनद दी गई। इसके अतिरिक्त, तीन श्रेष्ठ छात्रों गुलाम अशरफ, शमसुद्दीन और मोहम्मद आलम को नकद राशि व विशेष उपहार देकर सम्मानित किया गया। पूर्व में शब-ए-मेराज की बैठक में मुंहजबानी मुकम्मल कुरान सुनाने वाले सात छात्रों—मोहम्मद सईद रजा, नवाजिश हुसैन, मोहम्मद रेहान अंसारी, मोहम्मद अशहर, तौफीक रजा, मोहम्मद हस्सान रजा और मोहम्मद शहबाज खान—को प्रबंधक अबुल हसन खान अशरफी द्वारा ₹5100 की नकद राशि देकर सम्मानित किया गया था। मदरसा प्रबंधक अबुल हसन खान अशरफी ने इस अवसर पर कहा कि दीनी तालीम के साथ-साथ दुनियावी शिक्षा भी बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि मदरसा वर्ष 2007 से निरंतर अरबी-उर्दू के साथ हिंदी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान और कंप्यूटर की शिक्षा भी प्रदान कर रहा है। जलसा के सरपरस्त सैयद खलीक अशरफ ने मदरसा प्रबंधन की सराहना करते हुए इसे दीनी व सामाजिक विकास की मिसाल बताया। जलसे की सदारत प्रधानाचार्य मौलाना मुफ्ती महबूब आलम और निजामत मौलाना एजाज रजा हशमती ने की। कार्यक्रम का समापन मुल्क की तरक्की, अमन-ओ-अमान और खुशहाली की दुआ के साथ हुआ। इस अवसर पर बड़ी संख्या में उलेमा, गणमान्य लोग और क्षेत्रीय नागरिक मौजूद रहे।





































