श्रीदत्तगंज क्षेत्र की ग्राम पंचायत चमरूपुर के मजरा भरीवा में दो पुराने कुओं की सुरक्षा व्यवस्था न होने से ग्रामीण चिंतित हैं। ये कुएं न केवल पानी के स्रोत हैं, बल्कि ग्रामीणों की परंपरा और आस्था का भी अहम हिस्सा हैं। शादी-ब्याह और धार्मिक रस्मों में इनके विशेष महत्व के कारण इन्हें बंद करना ग्रामीणों के लिए संभव नहीं है। मजरा भरीवा में एक कुआं राम सहाय के घर के सामने और दूसरा हामिद के घर के सामने स्थित है। खुले होने के कारण रोजाना पालतू जानवर इनमें गिरकर घायल हो जाते हैं। स्थानीय लोग झाड़-पत्तियों और अस्थायी अवरोध लगाकर सुरक्षा का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन ये उपाय पर्याप्त नहीं हैं। ग्रामीण राम भवन, राम सहाय, अख्तर, राजकुमार, अफजल, रक्षाराम, दिलीप, लील्लाही, रामकरण, प्रभावती, मायावती, अफसरी, प्रवीन, नसरीन, हामिद, अमीना और साकीरा सहित कई अन्य ग्रामीणों ने प्रशासन से इन कुओं पर जाली या अन्य स्थायी सुरक्षा प्रबंध करने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि सुरक्षा सुनिश्चित होने से परंपरा और आस्था बनी रहेगी, साथ ही बच्चों और पालतू जानवरों की जान भी खतरे से बचेगी। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग की है, ताकि यह संकट समाप्त हो सके और भरीवा के कुएं अपनी परंपरा और महत्व के साथ सुरक्षित रह सकें।
खुले कुएं, पालतू जानवर गिरकर घायल:ग्रामीण चिंतित, प्रशासन से स्थायी सुरक्षा की मांग
श्रीदत्तगंज क्षेत्र की ग्राम पंचायत चमरूपुर के मजरा भरीवा में दो पुराने कुओं की सुरक्षा व्यवस्था न होने से ग्रामीण चिंतित हैं। ये कुएं न केवल पानी के स्रोत हैं, बल्कि ग्रामीणों की परंपरा और आस्था का भी अहम हिस्सा हैं। शादी-ब्याह और धार्मिक रस्मों में इनके विशेष महत्व के कारण इन्हें बंद करना ग्रामीणों के लिए संभव नहीं है। मजरा भरीवा में एक कुआं राम सहाय के घर के सामने और दूसरा हामिद के घर के सामने स्थित है। खुले होने के कारण रोजाना पालतू जानवर इनमें गिरकर घायल हो जाते हैं। स्थानीय लोग झाड़-पत्तियों और अस्थायी अवरोध लगाकर सुरक्षा का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन ये उपाय पर्याप्त नहीं हैं। ग्रामीण राम भवन, राम सहाय, अख्तर, राजकुमार, अफजल, रक्षाराम, दिलीप, लील्लाही, रामकरण, प्रभावती, मायावती, अफसरी, प्रवीन, नसरीन, हामिद, अमीना और साकीरा सहित कई अन्य ग्रामीणों ने प्रशासन से इन कुओं पर जाली या अन्य स्थायी सुरक्षा प्रबंध करने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि सुरक्षा सुनिश्चित होने से परंपरा और आस्था बनी रहेगी, साथ ही बच्चों और पालतू जानवरों की जान भी खतरे से बचेगी। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग की है, ताकि यह संकट समाप्त हो सके और भरीवा के कुएं अपनी परंपरा और महत्व के साथ सुरक्षित रह सकें।





































