सिद्धार्थनगर के ढेबरुआ थाना क्षेत्र में 2017 में हुए एक हत्या के मामले में शनिवार को अदालत ने फैसला सुनाया। करीब सात साल तक चली सुनवाई के बाद अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश मोहम्मद रफी की अदालत ने दो अभियुक्तों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई। अदालत ने परसादेवाइच गांव निवासी अनीत पत्नी अर्जुन को हत्या और साक्ष्य मिटाने का दोषी पाया। उसे आजीवन कारावास और 15,000 रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई गई है। न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि अपराध की योजना, क्रूरता और साक्ष्य छिपाने के प्रयास ने मामले को गंभीर बना दिया था। इस मामले में दूसरे अभियुक्त वसंतलाल प्रजापति पुत्र रामसेवक प्रजापति, निवासी कल्लूडीहवा, थाना गौरा चौराहा, जनपद बलरामपुर को अपराध में सहयोग और आरोपी को संरक्षण देने का दोषी ठहराया गया। अदालत ने उसे तीन वर्ष के कठोर कारावास और 5,200 रुपए के जुर्माने की सजा दी। यह मामला साल 2017 में दर्ज किया गया था और वाद संख्या 107/2022 के तहत अदालत में विचाराधीन था। सुनवाई के दौरान, अभियोजन पक्ष की ओर से सरकारी वकील चंद्र प्रकाश पाण्डेय ने गवाहों के बयान, परिस्थितिजन्य साक्ष्य और दस्तावेजी प्रमाणों के आधार पर प्रभावी बहस की। अदालत ने इन दलीलों को विश्वसनीय माना। न्यायालय ने टिप्पणी की कि हत्या जैसे जघन्य अपराध समाज की जड़ों को कमजोर करते हैं, और ऐसे मामलों में कोई नरमी नहीं बरती जा सकती। अदालत के अनुसार, दोषियों को दी गई यह सजा न केवल पीड़ित परिवार को न्याय दिलाती है, बल्कि समाज में कानून के प्रति विश्वास को भी मजबूत करती है। इस फैसले के बाद पीड़ित पक्ष ने संतोष व्यक्त किया। कानूनी जानकारों का कहना है कि यह निर्णय यह संदेश देता है कि अपराध कितना भी पुराना क्यों न हो, अपराधी कानून की पकड़ से बच नहीं सकते। लंबे समय से लंबित इस मामले में आया यह फैसला जिले के आपराधिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय है।
ढेबरुआ हत्याकांड में 7 साल बाद आया फैसला:महिला दोषी को उम्रकैद, सहयोगी को तीन साल का कठोर कारावास
सिद्धार्थनगर के ढेबरुआ थाना क्षेत्र में 2017 में हुए एक हत्या के मामले में शनिवार को अदालत ने फैसला सुनाया। करीब सात साल तक चली सुनवाई के बाद अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश मोहम्मद रफी की अदालत ने दो अभियुक्तों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई। अदालत ने परसादेवाइच गांव निवासी अनीत पत्नी अर्जुन को हत्या और साक्ष्य मिटाने का दोषी पाया। उसे आजीवन कारावास और 15,000 रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई गई है। न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि अपराध की योजना, क्रूरता और साक्ष्य छिपाने के प्रयास ने मामले को गंभीर बना दिया था। इस मामले में दूसरे अभियुक्त वसंतलाल प्रजापति पुत्र रामसेवक प्रजापति, निवासी कल्लूडीहवा, थाना गौरा चौराहा, जनपद बलरामपुर को अपराध में सहयोग और आरोपी को संरक्षण देने का दोषी ठहराया गया। अदालत ने उसे तीन वर्ष के कठोर कारावास और 5,200 रुपए के जुर्माने की सजा दी। यह मामला साल 2017 में दर्ज किया गया था और वाद संख्या 107/2022 के तहत अदालत में विचाराधीन था। सुनवाई के दौरान, अभियोजन पक्ष की ओर से सरकारी वकील चंद्र प्रकाश पाण्डेय ने गवाहों के बयान, परिस्थितिजन्य साक्ष्य और दस्तावेजी प्रमाणों के आधार पर प्रभावी बहस की। अदालत ने इन दलीलों को विश्वसनीय माना। न्यायालय ने टिप्पणी की कि हत्या जैसे जघन्य अपराध समाज की जड़ों को कमजोर करते हैं, और ऐसे मामलों में कोई नरमी नहीं बरती जा सकती। अदालत के अनुसार, दोषियों को दी गई यह सजा न केवल पीड़ित परिवार को न्याय दिलाती है, बल्कि समाज में कानून के प्रति विश्वास को भी मजबूत करती है। इस फैसले के बाद पीड़ित पक्ष ने संतोष व्यक्त किया। कानूनी जानकारों का कहना है कि यह निर्णय यह संदेश देता है कि अपराध कितना भी पुराना क्यों न हो, अपराधी कानून की पकड़ से बच नहीं सकते। लंबे समय से लंबित इस मामले में आया यह फैसला जिले के आपराधिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय है।










































