सिद्धार्थनगर में बाल श्रम मुक्त कार्यशाला आयोजित:विकास भवन से जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर किया रवाना

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शनिवार को सिद्धार्थनगर जनपद को बाल श्रम मुक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया। श्रम विभाग, ब्रिटिश एशियन ट्रस्ट और मानव संसाधन एवं महिला विकास संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में यह कार्यशाला बाल श्रम उन्मूलन एवं पुनर्वासन विषय पर केंद्रित थी। जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन के निर्देशन में आयोजित इस कार्यक्रम में बाल श्रम रोकने के लिए जिला कार्ययोजना के निर्माण और हॉटस्पॉट क्षेत्रों की पहचान पर विस्तृत चर्चा हुई। कार्यशाला के दौरान बाल श्रम मुक्त अभियान के तहत एक जागरूकता रथ को विकास भवन परिसर से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। पूर्व माध्यमिक विद्यालय बूड़ा की ब्रॉन्ज मेडल विजेता छात्रा सावित्री पासवान और उनकी टीम ने इस रथ को रवाना किया। सहायक श्रम आयुक्त सचिन कुमार सिंह ने बताया कि यह प्रचार वाहन पूरे जनपद में भ्रमण करेगा। इसका उद्देश्य समुदाय को बाल श्रम के दुष्प्रभावों, बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम 1986 और विभिन्न सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूक करना है। श्रमायुक्त कार्यालय, श्रम संसाधन केंद्र के राज्य समन्वयक सैयद रिजवान अली ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि सिद्धार्थनगर को बाल श्रम मुक्त बनाने के लिए व्यापार संगठनों, ईंट भट्ठा एसोसिएशन, रेस्टोरेंट संचालकों और सभी व्यापारियों का सहयोग अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सभी संगठनों से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि उनके प्रतिष्ठानों में कोई बच्चा कार्यरत न हो। सहायक श्रम आयुक्त सचिन कुमार सिंह ने बाल श्रम को एक सामाजिक बुराई के साथ-साथ गंभीर कानूनी अपराध बताया। उन्होंने कहा कि इसे समाप्त करने के लिए प्रशासन, समाज और स्वयंसेवी संगठनों को मिलकर ठोस प्रयास करने होंगे। ब्रिटिश एशियन ट्रस्ट के स्टेट लीड उमेश कुमार गुप्ता ने जोर देकर कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप तय समयसीमा में सिद्धार्थनगर को बाल श्रम मुक्त बनाना प्रशासन की प्राथमिकता है। मानव संसाधन एवं महिला विकास संस्थान के निदेशक भानुजा शरण लाल ने बाल श्रम उन्मूलन के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के शिक्षक डॉ. रविकांत शुक्ला ने विभागीय समन्वय पर बल देते हुए बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
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