पांच माह में भी नहीं हुआ मरम्मत पूरा:कलवारी-टांडा पुल का कार्य धीमा, 100 किमी लगाने पड़ रहे चक्कर

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लुम्बिनी-दुद्धी मार्ग पर बस्ती और अम्बेडकर नगर जिला को जोड़ने वाले कलवारी-टांडा पुल का मरम्मत कार्य बेहद धीमी गति से चल रहा है। पुल की मरम्मत 12 सितंबर से शुरू हुई थी और इसे तीन माह में पूरा होना था, लेकिन पांच महीने बीत जाने के बाद भी काम पूरा नहीं हो सका है। पुल से गुजरने वाले यात्रियों और क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि जिस रफ्तार से काम चल रहा है, उससे मरम्मत पूरा होने में एक वर्ष से अधिक समय लग सकता है। जबकि शासन ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को तीन महीने के भीतर काम पूरा करने का निर्देश दिया था। मशीनों की संख्या बढ़ाकर 10 एमटी की जाएगी एनएचएआई के इंजीनियरों का कहना है कि चार दिन बाद मशीनों की संख्या बढ़ाकर 10 एमटी कर दी जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर दिन-रात काम कर मरम्मत कार्य को तेज किया जाएगा। फिलहाल पुल के दोनों छोर पर मिट्टी का ढेर लगाकर बैरिकेडिंग की गई है। वहां डायवर्जन और रुकने के संकेतक भी लगाए गए हैं। चार पहिया और भारी वाहनों के आवागमन पर प्रतिबंध लगाया गया है, लेकिन इसके बावजूद कई वाहन पुल से गुजरते देखे जा रहे हैं। पैचवर्क और रेलिंग की मरम्मत के बावजूद सुधार नहीं हुआ था गौरतलब है कि वर्ष 2013 में करीब 1.19 रुपये की लागत से करीब सवा दो किलोमीटर लंबा यह पुल 72 खंभों पर बनाया गया था। खंभों, एक्सपेंशन जॉइंट, बेयरिंग, वायरिंग और सतह के क्षतिग्रस्त होने के बाद एनएचएआई ने इसकी रिपोर्ट शासन को भेजी थी। हाल के दिनों में पैचवर्क और रेलिंग की मरम्मत के बावजूद पुल की स्थिति में खास सुधार नहीं हुआ। मरम्मत कार्य लंबा खिंचने से लोगों को काफी परेशानी हो रही है। खासकर शादी-ब्याह के सीजन में बारातियों को पुल पार करने में दिक्कत हो रही है। पहले जहां लोग इस पुल के जरिए आसानी से बस्ती और अम्बेडकर नगर पहुंच जाते थे, वहीं अब उन्हें 100 किमी से अधिक का लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है।
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