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रुधौली ब्लाक के सेमरा गाँव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन पंडित राजकुमार शास्त्री ने ध्रुव, प्रहलाद और विदुर चरित्र का वर्णन किया। इस दौरान उन्होंने भगवान की कृपा और शरणागति की शक्ति के बारे में भक्तों को जानकारी दी। शास्त्री जी ने परीक्षित महाराज को सुखदेव मुनि द्वारा दिए गए ज्ञान और वैराग्य के पाठ का भी विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि यह प्रसंग भगवान के प्रति पूर्ण समर्पण का महत्व दर्शाता है। कथावाचक ने ब्रह्मा जी के प्रकट होने और भगवान विष्णु की नाभि से सृष्टि के विस्तार की कथा भी श्रोताओं को सुनाई। यह प्रसंग सृष्टि की उत्पत्ति और दिव्य शक्ति का बोध कराता है। पंडित शास्त्री ने ध्रुव जी की कथा का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि मात्र 5 वर्ष की आयु में अटूट विश्वास के साथ भगवान को प्राप्त करने की ध्रुव की कहानी भक्तों को प्रेरित करती है। उन्होंने भगवान में पूर्ण विश्वास, भक्ति और ज्ञान के महत्व पर प्रकाश डाला। शास्त्री जी ने अपने संदेश में कहा कि यह कथा भक्तों को सांसारिक मोह त्यागकर भगवान के प्रति समर्पित होने की प्रेरणा देती है।





























