बस्ती में श्रीमद्भागवत कथा:छठे दिन रुक्मिणी विवाह प्रसंग का वर्णन किया गया

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बस्ती जिले के हर्रैया तहसील क्षेत्र के महादेवरी गांव में चल रही संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन रुक्मिणी विवाह प्रसंग का वर्णन किया गया। श्री धाम वृन्दावन से पधारे कथावाचक सुन्दर शुक्ल जी महाराज ने यह प्रसंग सुनाया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। कथावाचक सुन्दर शुक्ल जी महाराज ने बताया कि विदर्भ के राजा भीष्मक की पुत्री रुक्मिणी ने बचपन से ही भगवान श्रीकृष्ण को अपना पति मान लिया था। हालांकि, उनके भाई रुक्मी ने उनका विवाह शिशुपाल से तय कर दिया था, जिससे रुक्मिणी चिंतित थीं। कथा व्यास के अनुसार, रुक्मिणी के अंतःपुर में सुदेव नामक ब्राह्मण का आना-जाना था। रुक्मिणी ने उन्हीं के माध्यम से सात श्लोकों में भगवान श्रीकृष्ण को अपना संदेश भेजा। इस पत्र में उन्होंने श्रीकृष्ण को स्वयं को प्राप्त करने का उपाय भी बताया। संदेश में रुक्मिणी ने लिखा था कि वे प्रतिदिन पार्वती पूजन के लिए मंदिर जाती हैं। उन्होंने श्रीकृष्ण से वहीं आकर उन्हें अपने साथ ले जाने का आग्रह किया। रुक्मिणी ने अपने संदेश में यह भी स्पष्ट किया कि यदि भगवान श्रीकृष्ण उन्हें स्वीकार नहीं करेंगे, तो वे किसी अन्य पुरुष से विवाह नहीं करेंगी और जन्म-जन्मांतर तक उनकी प्रतीक्षा करेंगी। यह संदेश मिलते ही भगवान श्रीकृष्ण तुरंत विदर्भ के लिए प्रस्थान कर गए। कथा के अनुसार, जब माता रुक्मिणी पार्वती पूजन के लिए मंदिर पहुंचीं, तभी भगवान श्रीकृष्ण वहां आए और उनका हरण कर अपने साथ ले गए। इसके बाद रुक्मिणी के पिता राजा भीष्मक ने विधि-विधान के साथ भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी का विवाह संपन्न कराया। कथावाचक ने इस दौरान भगवान श्रीकृष्ण के अन्य विवाह प्रसंगों का भी संक्षिप्त वर्णन किया। छठे दिन की कथा का समापन आरती और प्रसाद वितरण के साथ हुआ। इस अवसर पर मुख्य यजमान श्री तारक नारायन शुक्ल, जगदम्बा प्रसाद शुक्ल, प्रिय व्रत शुक्ल, सुशील पांडेय,कर्ण प्रसाद शुक्ल, धुव्र चन्द्र शुक्ल, आशुतोष शुक्ल, जय प्रकाश शुक्ल, राधिका चौधरी, अमित शुक्ल, श्रीपाल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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