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हर्रैया विकासखंड परिसर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में छुट्टा पशुओं की समस्या गंभीर रूप ले चुकी है। विकासखंड परिसर अक्सर इन पशुओं का बसेरा बन जाता है, जहां वे झुंड में घूमते रहते हैं। इस स्थिति के कारण विकासखंड कार्यालय आने वाले फरियादियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है। परिसर में पशुओं की मौजूदगी से अव्यवस्था फैलती है, जिससे कामकाज भी प्रभावित होता है। आरोप है कि विकासखंड में तैनात कर्मचारी और अधिकारी इस समस्या के प्रति उदासीन हैं। वे उच्चाधिकारियों के निर्देशों की अनदेखी कर रहे हैं। जिम्मेदार लोग छुट्टा पशुओं को गौशाला भेजने के बजाय उन्हें सड़कों पर भगा देते हैं, जिससे समस्या और बढ़ जाती है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी छुट्टा पशुओं की भरमार है, जबकि सरकारी गौशालाएं केवल शोपीस बनकर रह गई हैं। इन गौशालाओं का उद्देश्य छुट्टा पशुओं को आश्रय देना है, लेकिन वे अपने लक्ष्य को पूरा करने में विफल दिख रही हैं। जानकारी के अनुसार, हर्रैया विकासखंड की कई ग्राम पंचायतों में भ्रष्टाचार के कारण यह समस्या और विकराल रूप ले चुकी है। इस पूरे मामले में जिम्मेदार अधिकारी मूक दर्शक बने हुए हैं, जिससे स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है।




































