
विकास खंड गौर में मनरेगा के तहत चलाए गए पौधरोपण अभियान की सच्चाई स्थानीय सत्यापन में सामने आई है। जांच में कई ग्राम पंचायतों में लगाए गए अधिकांश पौधे सूखे पाए गए। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए डीसी मनरेगा संजय शर्मा ने खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) गौर को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। डीसी मनरेगा ने बीडीओ और कार्यक्रम अधिकारी मनरेगा केके सिंह को भेजे नोटिस में बताया कि अपर आयुक्त (मनरेगा) ग्राम्य विकास ने दैनिक समाचार पत्र हिंदुस्तान में 18 जनवरी को प्रकाशित खबर ‘नहीं मिल रहे एक करोड़ की लागत से लगाए गए सवा आठ लाख पौधे’ के संबंध में जांच कर रिपोर्ट मांगी थी। उनके निर्देश पर कराई गई जांच में स्थिति चिंताजनक पाई गई। जांच के दौरान विकास खंड की कुल 108 ग्राम पंचायतों में से 15 ग्राम पंचायतों — पेड़ार, मझिआवा चौधरी, ऐनपुर, बढ़ेरसर, एकटेकवा, कोल्हुसिया, मंसूरनगर, हरदी खास, मुसहा बरहेटा, डेंगरा, बेलवरिया जंगल, मद्रामनपुर, रानीपुर बाबू, किसुनपुर और पीनीजोत का औचक निरीक्षण किया गया। रैंडम स्थानीय सत्यापन में यह पाया गया कि इन ग्राम पंचायतों में पौधरोपण तो कराया गया था, लेकिन समुचित देखरेख और अनुरक्षण के अभाव में अधिकांश पौधे नष्ट हो गए। कई स्थानों पर पशुओं द्वारा नुकसान पहुंचाने के कारण भी पौधे काफी कमजोर मिले। जांच में यह भी सामने आया कि संबंधित ग्राम पंचायतों में अधिकारियों, ग्राम विकास अधिकारी, ग्राम रोजगार सेवक और ग्राम प्रधान द्वारा पौधों के संरक्षण व अनुरक्षण की कोई प्रभावी योजना नहीं बनाई गई। जबकि पौधरोपण के समय और समीक्षा बैठकों में पौधों की जीवितता सुनिश्चित करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए थे। डीसी मनरेगा ने नोटिस में कहा कि ग्राम पंचायतों में चल रही परियोजनाओं के पर्यवेक्षण की जिम्मेदारी खंड विकास अधिकारी की होती है। इसके बावजूद ब्लॉक स्तर पर बीडीओ और उनके अधीनस्थ एडीओ द्वारा कार्यों का शत-प्रतिशत स्थानीय निरीक्षण और सत्यापन नहीं किया गया। इसी लापरवाही के कारण पौधों के नष्ट होने की स्थिति बनी। डीसी मनरेगा ने बीडीओ गौर केके सिंह को निर्देश दिया है कि वे इस प्रकरण में उपलब्ध साक्ष्यों के साथ अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करें।





































