
बस्ती के विक्रमजोत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में एरियर भुगतान के नाम पर कमीशनखोरी का मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हलचल मची हुई है। आरोप है कि सीएचसी के प्रधान लिपिक प्रदीप श्रीवास्तव ने एक महिला स्वास्थ्यकर्मी से बकाया एरियर जारी कराने के बदले 10 प्रतिशत कमीशन मांगा। मामला तब तूल पकड़ गया जब रिश्वत लेते हुए उनका एक वीडियो वायरल हो गया। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए रविवार को आरोपी प्रधान लिपिक को गिरफ्तार कर लिया। वहीं मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) ने भी आरोपी कर्मचारी के निलंबन की संस्तुति शासन को भेज दी है। मामले की शुरुआत तब हुई जब स्वास्थ्य विभाग की महिला कर्मचारी सुनीता वर्मा का एरियर लंबे समय से लंबित था। इस संबंध में अदालत से भी भुगतान का आदेश जारी हो चुका था। इसके बावजूद एरियर जारी नहीं हो पा रहा था। आरोप है कि सीएचसी विक्रमजोत में तैनात प्रधान लिपिक प्रदीप श्रीवास्तव ने भुगतान प्रक्रिया आगे बढ़ाने के नाम पर पीड़िता से 10 प्रतिशत कमीशन की मांग की। दो किस्तों में लिए 45 हजार रुपए पीड़िता सुनीता वर्मा के अनुसार, प्रधान लिपिक ने उन पर लगातार दबाव बनाया और कहा कि बिना कमीशन दिए एरियर जारी नहीं होगा। उन्होंने बताया कि आरोपी ने उनसे दो किस्तों में कुल 45 हजार रुपये लिए। पहली बार 25 हजार रुपये और दूसरी बार 20 हजार रुपये दिए गए। इसके बाद भी आरोपी लगातार शेष राशि की मांग करता रहा। उसका कहना था कि जब तक पूरी 10 प्रतिशत कमीशन राशि—जो एक लाख रुपये से अधिक बनती है, नहीं दी जाएगी, तब तक एरियर भुगतान संभव नहीं है। रिश्वत लेते वीडियो वायरल, विभाग में मचा हड़कंप मामला उस समय और गंभीर हो गया जब कथित तौर पर रिश्वत लेते हुए प्रधान लिपिक का एक वीडियो सामने आ गया। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। मामले की जानकारी मिलने के बाद मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. राजीव निगम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी कर्मचारी के निलंबन की संस्तुति शासन को भेज दी। तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज, आरोपी गिरफ्तार मामले की जांच के लिए पुलिस ने पीड़िता को बुलाकर पूरी जानकारी ली। क्षेत्राधिकारी स्वर्णिमा सिंह ने बताया कि सुनीता वर्मा की तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी प्रधान लिपिक प्रदीप श्रीवास्तव को गिरफ्तार कर लिया है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहनता से जांच कर रही है और यह भी पता लगाया जा रहा है कि एरियर भुगतान के नाम पर कहीं और भी इस तरह की वसूली तो नहीं की गई।
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