
चैत्र नवरात्रि का आज से शुभारंभ हो गया है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा का विधान है। ऐसी मान्यता है कि इन पावन दिनों में व्रत-उपासना से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। इसी के साथ नव-संवत्सर यानी हिंदू नववर्ष की भी शुरुआत होती है। नवरात्रि 27 मार्च तक चलेगी, जिसमें देवी के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाएगी। नवरात्रि के पहले दिन देवी दुर्गा के माता शैलपुत्री स्वरूप की आराधना की जाती है। श्रद्धालु सुबह की पहली आरती के साथ नवरात्रि की शुरुआत को शुभ मानते हैं। इसी क्रम में हर्रैया तहसील क्षेत्र के महादेवरी गांव स्थित मां कात्यायनी मंदिर और बाबा दुःखछोर नाथ शिव मंदिर में भक्तों ने विशेष पूजा-अर्चना की। बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे और विधि-विधान से पूजा की। धर्म ग्रंथों के अनुसार, नवरात्रि माता भगवती की आराधना, संकल्प, साधना और सिद्धि का दिव्य समय है। ग्रंथों में उल्लेख है कि देवी ही ब्रह्मा, विष्णु और महेश के रूप में सृष्टि का सृजन, पालन और संहार करती हैं। मान्यता है कि भगवान महादेव के कहने पर रक्तबीज, शुंभ-निशुंभ, मधु-कैटभ जैसे दानवों का संहार करने के लिए मां पार्वती ने असंख्य रूप धारण किए थे। हालांकि, देवी के प्रमुख नौ रूपों की ही पूजा-अर्चना की जाती है। नवरात्रि का प्रत्येक दिन देवी मां के विशिष्ट रूप को समर्पित होता है और हर स्वरूप की उपासना से अलग-अलग मनोरथ पूर्ण होते हैं।
























