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श्रावस्ती जिले के नासिरगंज में शिया समुदाय ने 20 रमजान की रात को शब-ए-क़द्र के रूप में मनाया। इस पवित्र रात में मोमिनों ने विशेष इबादत और बख़्शाइस के अमल अदा किए। स्थानीय मस्जिद में शिया मोमिन नमाज़, दुआ-ए-जवशन-कबीर, कुरआन सिर पर रखकर बख़्शाइस की नीयत और ज़ियारत-आमाल में मशगूल रहे। इलाहाबादी मौलाना तुफैल अब्बास ने इस अवसर पर मरहूमीन के लिए दुआ की और मुल्क में अमन-चैन की अपील की। अम्मार रिजवी ने इफ़्तार और सफ़ाई का बंदोबस्त किया। इस रात अदा किए गए प्रमुख अमलों में दुआ-ए-इफ्तिताह का पाठ शामिल था, जो रमजान की हर रात की तरह किया जाता है। इसके अतिरिक्त, इमाम हुसैन (अ.स.) की ज़ियारत को भी बहुत पुण्यकारी माना गया। मोमिनों ने अपने गुनाहों की माफी मांगने और अल्लाह का जिक्र (तस्बीह) करने में भी समय बिताया। शब-ए-क़द्र की सबसे महत्वपूर्ण इबादतों में दो रकात की विशेष नमाज़ थी, जिसे गुनाहों की माफी के लिए बहुत फजीलत वाली माना जाता है। इसकी पहली रकात में सूरह अल-हम्द (फातिहा) के बाद सात बार सूरह इखलास (कुल हुवल-लाहो अहद) पढ़ी गई। दूसरी रकात में भी सूरह अल-हम्द के बाद सात बार सूरह इखलास का पाठ किया गया। नमाज़ के बाद, 70 बार “अस्तग़फ़िरुल्लाह रब्बी व अतूबु इलैहि” (मैं अपने रब अल्लाह से माफी मांगता हूँ और उसकी तरफ पलटता हूँ) दुआ पढ़ी गई। इस दौरान शिया समुदाय के कई प्रमुख सदस्य उपस्थित रहे, जिनमें शादाब हुसैन, फैजी हुसैन, सैफ रिजवी, नाजिम अली, मसर्रत, सिराज हैदर, कब्बन हुसैन, आकिल रिजवी और सरफराज हुसैन शामिल थे।



































