जमुनहा में शबे क़द्र पर मस्जिदों में उमड़ी भीड़:उलेमा बोले, यह रात हजार महीनों से बेहतर है

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रमज़ान की 23वीं रात को शबे क़द्र के अवसर पर मस्जिदों और इमामबाड़ों में बड़ी संख्या में लोगों ने इबादत की। बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों सहित रोज़ेदारों ने नफिल नमाज़ अदा की, कुरआन शरीफ की तिलावत की और देर रात तक दुआएं कीं। इस दौरान पूरे माहौल में इबादत और भक्ति का वातावरण बना रहा। इस अवसर पर मौलाना तुफैल हैदर साहब इलाहाबादी ने बताया कि कुरआन शरीफ के अनुसार, शबे क़द्र की रात हजार महीनों से बेहतर होती है। यह माना जाता है कि इसी पवित्र रात में कुरआन शरीफ का अवतरण हुआ था और इसी रात को कुरआन के मुकम्मल होने की बात भी कही जाती है। इस कारण इस रात का विशेष महत्व है। उन्होंने आगे कहा कि शबे क़द्र की रात में अल्लाह की विशेष रहमत उतरती है और फरिश्ते ज़मीन पर आते हैं। जो व्यक्ति इस रात सच्चे दिल से इबादत करता है, अल्लाह उसके गुनाह माफ कर देता है और उसकी दुआएं स्वीकार करता है। यह रात बहुत फज़ीलत और बरकत वाली मानी जाती है, इसलिए मुसलमानों को इस पवित्र रात को इबादत, तिलावत और दुआ में बिताना चाहिए।
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