
श्रावस्ती जिले के नासिरगंज में सुबह से हो रही हल्की बूंदा-बांदी ने गेहूं की पकती फसल के लिए जोखिम बढ़ा दिया है। किसानों को फसल को होने वाले संभावित नुकसान की चिंता सता रही है। किसान छब्बन हुसैन ने बताया कि एक-दो घंटे की हल्की फुहार से ज्यादा नुकसान नहीं होता। हालांकि, यदि बालियां भीगने के बाद बादल और धूप का सिलसिला बना रहा और नमी लंबे समय तक बनी रही, तो रस्ट या ब्लाइट जैसे रोगों का खतरा बढ़ सकता है। इससे दाने का वजन कम हो सकता है और बालियों के देर तक गीली रहने से फसल के गिरने (lodging) की आशंका भी रहती है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे खेतों में पानी जमा न होने दें और बालियों को हाथ से झाड़कर पानी जल्दी उतार दें। यदि अगले 3-5 दिन मौसम साफ रहता है, तो रोग का खतरा कम रहेगा। हालांकि, लगातार नमी बनी रहने की स्थिति में कृषि सलाहकार से संपर्क कर आवश्यक उपाय अपनाने की सलाह दी गई है। एक अन्य किसान आरिफ खान ने बताया कि आमतौर पर रात की ओस के बाद सुबह जल्दी धूप और हवा लगने से पौधे सूख जाते हैं, जिससे फसल को फायदा होता है और नमी से तनाव कम होता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि ओस देर तक बनी रहे या दाने भरने/पकने के समय कई दिनों तक लगातार ऐसी नमी रहे, तो पत्ती-रस्ट, ब्लाइट या फफूंद के बढ़ने की संभावना बढ़ जाती है और दाने हल्के रह सकते हैं। इसलिए, हल्की ओस के साथ सुबह साफ मौसम ठीक है, लेकिन लंबे समय तक गीलापन और बादलों वाला मौसम रोग का दबाव बढ़ा सकता है।




































