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गंगा के पानी के लिए भारत आ रहे हैं बांग्लादेश के विदेश मंत्री, बात क्या करेंगे?

बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद भारत के साथ जो तल्खियां सामने आई थीं, उनपर जमी बर्फ अब हटने लगी है। दोनों पड़ोसी देशों के रिश्ते अब सुधरने लगे हैं। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच पैदा हुए तेल और गैस संकट के बाद भारत ने बांग्लादेश को हजारों लीटर पेट्रोल-डीजल दिया है। इस मदद के अलावा भी भारत, बांग्लादेश के मदद कर रहा है। इन्हीं घटनाक्रमों के बीच बांग्लादेश के नई सरकार में बने विदेश मंत्री खलीलुर रहमान भारत दौरे पर आ रहे हैं।

अब बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री तारीक रहमान हैं। खलीलुर रहमान अगले हफ्ते भारत दौरे पर आ सकते हैं। इस मामले से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, दोनों देश इस मुलाकात के दौरान ‘गंगा वाटर्स ट्रीटी’ को फिर से चालू करने पर बात कर सकते हैं। गंगा वाटर्स ट्रीटी का कैंट्रैक्ट इस साल खत्म हो रहा है। इसके अलावा मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध की वजह बांग्लादेश ने भारत से अतिरिक्त फ्यूल सप्लाई करने को कहा है।

रहमान 8 अप्रैल को आएंगे भारत

खलीलुर रहमान इंडियन ओशन कॉन्फ्रेंस के लिए मॉरीशस जाएंगे। मगर, इससे पहले वह नई दिल्ली आएंगे। 8 अप्रैल को उनके विदेश मंत्री एस जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल से मिलने की उम्मीद है।

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रिश्ते सुधारने की हो रही है कोशिश

काफी उथल-पुथल के बाद बांग्लादेश में बनी तारिक रहमान सरकार के किसी सीनियर मंत्री का यह पहला भारत दौरा है। यह दौरा ऐसे समय में होगा जब दोनों देश अपने बिगड़े हुए रिश्तों को फिर से सुधारने की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।

भारत से मागेंगे समर्थन

दरअसल, 2026-2027 के लिए संयुक्त राष्ट्र जनरल असेंबली की प्रेसीडेंसी के लिए बांग्लादेश के नॉमिनी के तौर पर खलीलुर रहमान हैं। ढाका को उम्मीद है कि वे चुनाव के लिए भारत से समर्थन मांगेंगे। खलीलुर रहमान जिनेवा और न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र में कई सीनियर पदों पर काम कर चुके हैं।

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गंगा वारट ट्रीटी

बता दें कि 1996 में साइन की गई गंगा के पानी के बंटवारे के लिए तीन दशक पुरानी ट्रीटी के रिन्यूअल को लेकर दोनों देशों में बात चल रही है। यह वह समझौता है जिसमें भारत गंगा नदी के पानी को बांग्लादेश में डिस्चार्ज को कंट्रोल करता है।

अधिकारियों ने कहा है कि गंगा के पानी के बहाव पर पर्यावरण के दुष्परिणाम का असर और पश्चिम बंगाल सरकार की भूमिका इस डील के लिए जरूरी फैक्टर हैं। राज्य सरकार को पानी-बंटवारे की ट्रीटी के रिन्यूअल पर साइन करना है।

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