कार्यालय ब्यूरो।
महराजगंज (निचलौल): इंसानियत को तार-तार कर देने वाली एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके में आक्रोश भर दिया है। निचलौल थाना क्षेत्र के बरोहिया चौराहे पर एक 62 वर्षीय बुजुर्ग ने पड़ोस में रहने वाली मात्र 8 वर्ष की मासूम बच्ची के साथ छेड़खानी कर अपनी दूषित मानसिकता का परिचय दिया।
*पवित्रता का ढोंग और घिनौनी करतूत।*
हैरान कर देने वाली बात यह है कि आरोपी खुद को एक धार्मिक संस्था से जुड़ा बताता है और समाज में अपनी छवि एक ‘विशिष्ट व्यक्ति’ के रूप में पेश करता है। लेकिन इस घटना ने साफ कर दिया है कि वह धर्म और समाज सेवा की आड़ में अपने काले कारनामों को छिपा रहा था।
*आइये जानते हैं पूरा मामला क्या हैं।*
8 साल की सोनी (नाम परिवर्तित) हमेशा की तरह अपने पड़ोसी के घर खेलने गई थी। उसे क्या पता था कि जिस बुजुर्ग को वह सम्मान की नजर से देखती है, वह एक दरिंदा है।बच्ची ने घर लौटकर रोते हुए अपनी आपबीती सुनाई, जिसके बाद परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई।जैसे ही गुस्साए परिजन आरोपी के घर पहुंचे, वह मौका देखकर वहां से फरार हो गया।
*पुराना है ‘पाप’ का इतिहास!*
स्थानीय सूत्रों और दबी जुबानों की मानें तो इस ‘पीलेपोश’ दानव का यह पहला कारनामा नहीं है। बताया जा रहा है कि कॉलेज के दिनों से ही इसकी हरकतें संदिग्ध रही हैं और यह कई ऐसी घटनाओं को अंजाम दे चुका है। समाज में अपनी पकड़ और ‘धार्मिक रसूख’ के दम पर यह अब तक बचता रहा है।
*समाज से सवाल: कब तक सहेंगे ऐसे ‘भेड़िए’?*
ऐसे लोग जो दिन में माला जपते हैं और मौका मिलते ही मासूमों की गरिमा से खेलते हैं, उन्हें समाज में रहने का कोई अधिकार नहीं है।
> प्रशासन को इस मामले में कड़ी से कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए ताकि यह भगोड़ा आरोपी सलाखों के पीछे हो। ऐसे ‘मानव रूपी दानव’ की असली जगह समाज के बीच नहीं, बल्कि जेल की कालकोठरी में है।











