मिडिल-ईस्ट संकट के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब एक नया बयान जारी कर दिया है। उन्होंने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि जिन भी देशों को होर्मुज स्ट्रेट के कारण जेट फ्यूल न मिल रहा हो उनके लिए दो सुझाव हैं। पहला यह कि वे अमेरिका से तेल खरीदें क्योंकि अमेरिका के पास ढेर सारा तेल है और दूसरा कि थोड़ा हिम्मत जुटाएं और होर्मुज स्ट्रेट में जाकर वहां से जेट फ्यूल ले लें।
ट्रंप ने कहा कि ‘अपना तेल खुद ले आओ’। होर्मुज स्ट्रेट बाधित होने की वजह से पूरी दुनिया में में ईंधन की सप्लाई कमी आ रही है और कीमतें बहुत तेजी से बढ़ रही हैं। ट्रंप ने कहा जिन देशों ने यूनाइटेड किंगडम की तरह ईरान के खिलाफ अमेरिका साथ देने से मना कर दिया उन्हें या तो अमेरिका से तेल खरीदना चाहिए और या तो होर्मुज स्ट्रेट में जाकर तेल ले लें।
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ट्रंप ने कहा- अपना तेल खुद लो
ट्रंप ने आगे कहा, ‘आप लोगों को अपने लिए लड़ना सीखना होगा लेकिन अमेरिका आपकी सहायता के लिए वहां मौजूद नहीं होगा, बिल्कुल वैसे ही जैसे आप हमारे साथ खड़े नहीं थे। ईरान का सफाया हो गया है। मुश्किल काम हो गया है। अब जाओ और अपना तेल ले लो।’
ट्रंप ने TruthSocial पर एक पोस्ट लिखा। इस पोस्ट में उन्होंने खासतौर पर ब्रिटेन पर निशाना साधा और कहा कि अमेरिका के पास जेट फ्यूल (विमान ईंधन) काफी है। उन्होंने यूरोपीय देशों को सलाह दी कि वे अमेरिका से ही ईंधन खरीदें।
स्पेन इटली ने किया था मना
इससे पहले ईरान पर हमला करने के लिए स्पेन और इटली ने अपना एयरबेस यूज करने से अमेरिका को मना कर दिया था। साथ ही स्पेन ने अपने हवाई क्षेत्र से भी होकर गुजरने के लिए अमेरिका के फाइलटर जेट पर भी प्रतिबंध लगा दिया था।
इटली ने कहा कि जिन विमानों को इटली में रुकने की इजाजत मांगी जा रही थी वे रेग्युलर या लॉजिस्टिकल फ्लाइटें नहीं थीं जो कि इटली की संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ मौजूदा संधि के तहत आते हैं।
अमेरिका ने दक्षिणी स्पेन के ठिकानों पर B-52 और B-1 जैसे रणनीतिक बमवर्षक विमानों को तैनात करने पर भी विचार किया था, लेकिन इस प्रस्ताव को तब रद्द कर दिया गया जब मैड्रिड ने यह स्पष्ट कर दिया कि वह बिना अंतरराष्ट्रीय कानूनी समर्थन के ऐसे अभियानों का समर्थन नहीं करेगा।
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पिछले महीने से बढ़ा तनाव
ईरान-इजरायल-अमेरिका के बीच 28 फरवरी से युद्ध की स्थिति बनी हुई है। 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका ने ईरान के खिलाफ संयुक्त हमला शुरू किया था। इसके जवाब में ईरान ने भी ड्रोन और मिसाइलें दागीं जिनमें इजरायल सहित कई खाड़ी देशों को निशाना बनाया गया जहां पर अमेरिकी ठिकाने हैं। इन हमलों से जानमाल और बुनियादी ढांचों का काफी नुकसान हुआ।











