इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गैर-जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) प्रकरण में बस्ती के पुलिस अधीक्षक (एसपी) की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने एसपी को अवमानना की चेतावनी देते हुए एक सप्ताह के भीतर व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि वारंट जारी करना उसका विशेषाधिकार है, इसमें पुलिस प्रशासन की राय का कोई स्थान नहीं है। न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर एवं न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ क्रिमिनल मिस. रिट पिटीशन संख्या 26479/2025 (रत्नेश कुमार उर्फ राजू शुक्ला बनाम स्टेट ऑफ यूपी व अन्य) की सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान सामने आया कि जांच अधिकारी राधेश्याम त्रिपाठी ने आरोपियों को पेश करने के लिए न्यायालय से एनबीडब्ल्यू प्राप्त किया था। इसके बाद एसपी बस्ती ने जांच अधिकारी को यह कहते हुए निलंबित कर दिया कि वारंट बिना पर्याप्त साक्ष्य के लिया गया था। कोर्ट ने एसपी की इस कार्रवाई को प्रथम दृष्टया न्यायालय की अवमानना से जुड़ा मानते हुए कड़ा ऐतराज जताया। पीठ ने कहा कि वारंट जारी करना न्यायिक अधिकार क्षेत्र में आता है और इस पर टिप्पणी करना न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप के समान है। यह मामला 28 अगस्त 2025 का है, जब थाना वाल्टरगंज क्षेत्र के जिनवा चौराहे पर एक व्यक्ति पर धारदार हथियार से जानलेवा हमला किया गया था। पुलिस ने इस मामले में एक अभियुक्त को गिरफ्तार किया है, जबकि अन्य आरोपी अभी भी फरार हैं। याचिकाकर्ता ने इसी प्रकरण में उच्च न्यायालय में रिट दाखिल की थी, जिस पर सुनवाई के दौरान अदालत ने एसपी की कार्यप्रणाली को लापरवाहीपूर्ण माना। अदालत ने एसपी बस्ती को निर्देश दिया है कि वे एक सप्ताह के भीतर व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करें। इस हलफनामे में निलंबन के आधार और की गई टिप्पणी का स्पष्ट कारण बताना होगा। कोर्ट ने चेतावनी दी है कि यदि स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाया गया, तो संबंधित अधिकारी के विरुद्ध आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू की जा सकती है। मामले की अगली सुनवाई 10 अप्रैल 2026 को निर्धारित की गई है।
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हाईकोर्ट ने बस्ती एसपी को अवमानना की चेतावनी दी:एनबीडब्ल्यू मामले में जांच अधिकारी के निलंबन पर मांगा व्यक्तिगत हलफनामा
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