कोलकाता के नजदीक बसा हुगली पश्चिम बंगाल का ऐतिहासिक शहर है। इसे पुर्तगालियों ने 1579–80 में बसाया था। यह भारत की पहली यूरोपीय बस्ती थी। चिनसुराह शहर को जिले का मुख्यालय बनाया गया। माना जाता है कि दलदली और नदियों के किनारे पाए जाने वाले ऊंचे सरकंडे ‘होगला’ से शहर का नाम हुगली पड़ा है। साल 1795 में अंग्रेजों ने बर्दवान जिले को दो हिस्सों में बांटा। उत्तरी हिस्से को बर्दवान और दक्षिणी को हुगली नाम दिया गया। साल 1822 में हुगली में अलग कलेक्ट्रेट का निर्माण किया गया।
हुगली नदी के किनारे बसे होने के कारण यह शहर पुर्तगालियों और अंग्रेजों के समय बंगाल का सबसे बड़ा बंदरगाह रहा। महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र होने के कारण हुगली डच, डेनिश, ब्रिटिश, फ्रांसीसी, बेल्जियम और जर्मन के लोगों का गढ़ रहा।
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1690 ने अंग्रेजों ने हुगली का व्यापार कोलकाता स्थानांतरित करना शुरू कर दिया। इसकी वजह यह थी कि कोलकाता बंगाल की खाड़ी के करीब था और हुगली की अपेक्षा अधिक सुरक्षित था। नतीजा यह हुआ कि कोलकाता का उदय हुआ और हुगली का सूर्यास्त होने लगा। 1843 में हुगली से अलग करके हावड़ा जिला बनाया गया। 1872 में हुगली के दक्षिण-पश्चिम हिस्से को मेदिनीपुर जिले में मिला दिया गया।
तहसील और ब्लॉक: हुगली जिले में चिनसुराह, चंदननगर, श्रीरामपुर और आरामबाग नाम से कुल चार तहसीलें हैं। वहीं 18 ब्लॉक हैं। इनमें बालागढ़, चुचुरा-मोगरा, धनियाखी, पांडुआ, पोल्बा-दादापुर, हरिपल, सिंगूर, तारकेवार, चंदिताला-1, चंदिताला- 2, जंगली, श्रीरामपुर उत्तरपारा, आरामबाग, खानकुल-1, खानकुल-2, गोघाट-1, गोघाट-2 और पुरसुरा शामिल हैं।
ऐतिहासिक धरोहर: बांडेल का चर्च पूरे देश में प्रसिद्ध है।1599 में पुर्तगाली व्यापारियों ने इस चर्च की स्थापना की थी। यह बंगाल का पहला चर्च है। वहीं पुंडूआ भी अपने साथ ऐतिहासिक धरोहरों को समेटे हैं। यहां आज भी ऐतिहासिक मस्जिद और मीनार के अवशेष दूर दूर से लोग देखने आते हैं। जिले का चंदननगर एक समय फ्रांसीसियों की राजधानी था। यहां गंगा नदी के किनारे आज भी कई फ्रांसीसी इमारतें अपना इतिहास बयां कर रही हैं।
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विधानसभा सीटें: हुगली जिले में कुल 18 विधानसभा सीटे हैं। यहां की बलागढ़, धनियाखली, खनकुल और गोघाट विधानसभा सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं। जंगीपाड़ा, चंदितला, उत्तरपाड़ा, सेरामपुर और चंपदानी विधानसभा सीटें श्रीरामपुर लोकसभा का हिस्सा हैं। वहीं चंदननगर, सिंगूर, हरिपाल, चिनसुराह, बांसबेरिया, पॉल्बा और धनियाखली हुगली लोकसभा सीट में आती हैं। पुरसुराह, खनकुल, अरामबाग, गोगाट और तारकेश्वर अरामबाग लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है।
धार्मिक स्थल: हुगली में तारकेश्वर मंदिर, श्री रामकृष्ण मठ, हुगली इमामबाड़ा और हंगेश्वरी मंदिर जैसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थल भी हैं।
सामाजिक ताना बाना: साल 2011 की जनगणना के मुताबिक हुगली की कुल जनसंख्या 5,519,145 है। इनमें 2,814,653 पुरुष और 2,704,492 महिलाएं हैं। यहां 1000 पुरुषों में 961 महिलाएं हैं। अगर सामाजिक ताने-बाने की बात करें तो हुगली में 82.89 फीसद हिंदू और 15.77 प्रतिशत मुस्लिम आबादी है। यहां की करीब 61.43% आबादी ग्रामीण इलाके में रहती है। जिले में करीब 1086 परिवार बेघर हैं। जिले के पूर्व में नादिया जिला, दक्षिण पूर्व में उत्तर 24 परगना, उत्तर में बर्धमान और दक्षिण में हावड़ा, दक्षिण पश्चिम में पश्चिमी मेदिनीपुर और पश्चिम में बांकुरा जिला स्थित है।
हुगली में कौन मजबूत: 2021 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने हुगली लोकसभा सीट में आने वाली सभी सातों विधानसभा सीटों पर कब्जा जमाया था। 2016 के विधानसभा चुनाव में टीएमसी ने 18 में से 16 सीटों पर जीत हासिल की थी। वहीं पांडुआ सीट पर माकपा और चांपदानी विधानसभा सीट पर कांग्रेस ने फतेह हासिल की थी। अगर लोकसभा चुनाव की बात करें तो 2019 में बीजेपी की लॉकेट चटर्जी और 2024 में टीएमसी की रचना बनर्जी ने जीत हासिल की। 2021 के चुनाव में हुगली जिले की 18 विधानसभा सीटों पर टीएमसी और चार सीटों पर बीजेपी ने जीत दर्ज की थी।
जिले की स्थिति
- क्षेत्रफल- 3149 वर्ग किलोमीटर
- साक्षरता दर- 75.11%
- विधानसभा सीटें- 18
- नगर पालिका- 12
- नगर निगम- 1
- ब्लॉक- 18
- ग्राम पंचायत- 207










