दुबई, कुवैत सिटी और रियाद जैसे शहरों की कैफे में पिछले कई दशकों से भारतीय कॉफी पहुंच रही है लेकिन अब निर्यातकों को डर है कि उनका सबसे तेजी से बढ़ता बाजार 80 प्रतिशत तक खत्म हो सकता है। बढ़ती फ्रेट लागत और समुद्री रुकावटों की वजह से यह संकट आया है।
अमेरिका और ईरान के बीच अस्थायी सीजफायर के बावजूद व्यापार मार्ग अभी भी उलझे हुए हैं। शिपिंग की लागत इतनी ज्यादा हो गई है कि पूरी इंडस्ट्री पर दबाव पड़ रहा है। रविवार सुबह पाकिस्तान में 21 घंटे की लंबी बातचीत के बाद भी कोई समझौता नहीं हुआ। अमेरिकी उपराष्ट्रपति और मुख्य वार्ताकार जेडी वेंस ने कहा कि ईरान ने अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम पर अमेरिका की शर्तें मानने से इनकार कर दिया। इसलिए कोई डील नहीं हुई।
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होर्मुज स्ट्रेट में रुकावट
भारतीय कॉफी निर्यातकों के लिए यह खबर चिंताजनक है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में रुकावट लंबे समय तक रह सकती है। भारत दुनिया का सातवां सबसे बड़ा कॉफी उत्पादक देश है। भारत अपनी कुल कॉफी का करीब 70 प्रतिशत निर्यात करता है।
पिछले 10 साल में भारत ने पश्चिम एशिया (मध्य पूर्व) में अच्छी बढ़ोतरी की है। UAE, जॉर्डन और सऊदी अरब जैसे देश 2024 में भारत के कुल कॉफी निर्यात का 16 प्रतिशत हिस्सा थे। कॉफी एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष रमेश राजा ने बताया, ‘आने वाले महीनों में हम पश्चिम एशिया के बाजार का 80 प्रतिशत तक हिस्सा खो सकते हैं।’
फ्रेट लागत हुई दोगुनी
ज्यादा भारतीय कॉफी होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते जाती है। शिपमेंट देरी से पहुंच रहे हैं, रास्ते बदल रहे हैं या ट्रांसशिपमेंट पॉइंट पर अटके हुए हैं। फ्रेट लागत बढ़ने से मुनाफा कम हो रहा है।
फरवरी में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष शुरू होने के बाद फ्रेट लागत दोगुनी हो गई है। यूरोप के खरीदार अब युगांडा जैसी जगहों से कॉफी लेने लगे हैं। इससे भारत का बाजार छिनने का खतरा है।
कॉफी निर्यात में स्वर्ण युग पर असर
भारत का कॉफी क्षेत्र पिछले कुछ सालों में बहुत तरक्की कर रहा था। 2023 में निर्यात से 1.14 अरब डॉलर की कमाई हुई थी जो पिछले साल बढ़कर रिकॉर्ड 2.13 अरब डॉलर हो गई। भारत हर साल 3.5 से 3.7 लाख मीट्रिक टन कॉफी पैदा करता है जो दुनिया के कुल उत्पादन का 3-4 प्रतिशत है।
बद्रा एस्टेट्स के मैनेजिंग डायरेक्टर जैकब मामेन ने कहा कि 1990 के दशक में लिबरलाइजेशन के बाद भारतीय कॉफी उद्योग ने खुद को नई तरीके से तैयार किया। यूरोप और एशिया में अपनी जगह बनाई और स्पेशलिटी कॉफी पर फोकस बढ़ाया।
रोबस्टा का खूब उत्पादन
भारत अरेबिका और रोबस्टा दोनों तरह की कॉफी पैदा करता है। रोबस्टा 70 प्रतिशत उत्पादन है। प्रीमियम रोबस्टा, मानसून मालाबार जैसी स्पेशलिटी कॉफी इटली, जर्मनी, रूस जैसे देशों में अच्छी चलती है। जापान को इंस्टेंट कॉफी भी भेजी जाती है।
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संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार, 2024 में पश्चिम एशिया भारत के कॉफी निर्यात का 16.1 प्रतिशत था, जो 10 साल पहले 12.6 प्रतिशत था। अभी इस क्षेत्र में अस्थिरता जारी है, जिससे भारतीय कॉफी निर्यातकों की चिंता बढ़ गई है।












