देश के विश्वविद्यालयों में बौद्ध अध्ययन को मुख्यधारा में शामिल करने का मुद्दा 30 मार्च को लोकसभा में उठाया गया। सांसद जगदम्बिका पाल ने सरकार से इस संबंध में स्पष्ट योजना और की गई पहल की जानकारी मांगी। सांसद पाल ने प्रश्नकाल के दौरान पूछा कि क्या राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत भारतीय ज्ञान परंपरा को बढ़ावा देते हुए बौद्ध अध्ययन को स्नातक, स्नातकोत्तर और शोध स्तर पर व्यवस्थित रूप से विकसित किया जा रहा है। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि क्या बौद्ध अध्ययन के लिए एक मानकीकृत पाठ्यक्रम तैयार किया जा रहा है। इस प्रस्तावित पाठ्यक्रम में पाली भाषा, बौद्ध दर्शन, तिब्बती अध्ययन, पुरातत्व और विरासत संरक्षण जैसे विषयों को शामिल करने की बात कही गई। सांसद ने उत्तर प्रदेश के महत्वपूर्ण बौद्ध सर्किट—सिद्धार्थनगर, कपिलवस्तु, श्रावस्ती और कुशीनगर—तथा धर्मशाला जैसे क्षेत्रों में उत्कृष्टता केंद्र या विशेष अध्यासन स्थापित करने की योजना पर भी सवाल उठाए। उन्होंने श्रीलंका, जापान, थाईलैंड, भूटान और म्यांमार जैसे बौद्ध देशों के साथ शैक्षिक और सांस्कृतिक सहयोग बढ़ाने के लिए ठोस पहल की आवश्यकता पर जोर दिया। जगदम्बिका पाल ने अपनी बात रखते हुए कहा कि भारत की समृद्ध बौद्ध विरासत को शिक्षा, संस्कृति और वैश्विक कूटनीति से जोड़ना समय की मांग है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के बौद्ध सर्किट क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विकसित करने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया। सरकार ने अपने उत्तर में बताया कि बौद्ध अध्ययन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न विश्वविद्यालयों में पहले से ही पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त, डिजिटल शिक्षा मंच SWAYAM पर भी बौद्ध अध्ययन से संबंधित कोर्स उपलब्ध हैं। सरकार ने यह भी संकेत दिया कि भारतीय ज्ञान परंपरा को मजबूत करने और बौद्ध अध्ययन को व्यापक स्तर पर प्रोत्साहन देने के लिए भविष्य में और कदम उठाए जाएंगे।
लोकसभा में बौद्ध अध्ययन को मुख्यधारा में लाने का मुद्दा:सिद्धार्थनगर में सांसद ने सरकार से मांगी जानकारी, पाठ्यक्रम पर भी सवाल
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