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वृंदावन में इस जगह नहीं पहुंचा कलियुग, टटिया की अनोखी परंपरा का सच जानिए

वृंदावन क्षेत्र के पास टटिया वह स्थान है, जहां आज भी द्वापर युग की तरह प्राकृतिक सुंदरता बरकरार है। माना जाता है कि यहां कलियुग का आना ही अभी तक नहीं हुआ है। धार्मिक मान्यता के मुताबिक टटिया स्थान पर भगवान कृष्ण ने अपना देह त्यागा था। धार्मिक जानकारों का मानना है कि भगवान कृष्ण के शरीर छोड़ने के बाद ही कलियुग की शुरुआत हो गई थी लेकिन टटिया में आज भी द्वापर युग जीवित है। टटिया में श्री मोहिनी बिहारी मंदिर है, जहां भगवान कृष्ण और राधा जी की पूजा-अर्चना की जाती है। इस मंदिर के दर्शन करने देश-दुनिया से कई लोग आते हैं। इस जगह पर ही संत हरिदास जी का निवास था। संत हरिदास भगवान कृष्ण के सबसे बड़े भक्त माने जाते हैं। उन्होंने यहीं पर संगीत का ज्ञान प्राप्त किया था।

पहले टटिया स्थान चारों तरफ से बांस और डंडों से घिरा रहता था, जिसे स्थानीय लोग टटिया कहते थे। इसी वजह से इस स्थान को टटिया कहा जाता है। मान्यता है कि यहां रहने वाले लोग बिजली, फोन और आधुनिक मशीनों के बजाय सादगी और सुकून भरा जीवन जीते हैं। यहां श्री मोहिनी बिहारी मंदिर में हर दिन भव्यता के साथ पूजा-अर्चना होती है। आइए जान लेते हैं कि इस स्थान की क्या खासियत हैं।

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टटिया स्थान की खासियत

टटिया स्थान वृंदावन के शोर-शराबे से बिल्कुल विपरीत और खास है। यहां के श्री मोहिनी बिहारी मंदिर में राधा अष्टमी के दिन कई श्रद्धालु आते हैं। यहां के लोग नल के पानी के बजाय कुएं के पानी का प्रयोग करते हैं। यहां की सबसे खास बात यह है कि यहां रहने वाले साधु-संत दान-दक्षिणा नहीं लेते हैं। इसके अलावा श्री मोहिनी बिहारी मंदिर में भी दान पेटी नहीं रखी गई है।

हरिदास संप्रदाय का उदय

माना जाता है कि हरिदास संप्रदाय के पहले आचार्य हरिदास जी यहीं रहते थे। हरिदास जी के सातवें शिष्य श्री ललित किशोर जी यहां भजन करते थे, जिनके शिष्य महंत श्री ललित मोहन दास ने 1823 में श्री मोहिनी बिहारी जी का मंदिर बनवाया था। मंदिर के आसपास बांस की टटिया लगाई गई थी, जिसकी वजह से आज भी यहां चारों तरफ बांस के पेड़ देखने को मिलते हैं।

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टटिया पवित्र स्थल कैसे पहुंचें?

यह स्थल वृंदावन के निधिवन से सिर्फ एक किलोमीटर दूर है। जो लोग इस जगह पर जाना चाहते हैं, वे अपने राज्य से ट्रेन या बस के जरिए मथुरा आ सकते हैं। फिर वहां से वृंदावन बस या कार से पहुंच जाए। वृंदावन पहुंचने के बाद एक घंटे में टटिया धाम जाया जा सकता है।

टटिया स्थान पर जाने के विशेष नियम

फोन स्विच ऑफ रखें – यहां आने वाले सभी लोगों को मोबाइल चलाने से बचना चाहिए क्योंकि यहां फोटो खींचना और फोन चलाना प्रतिबंधित है।

सिर ढक कर रखें – माना जाता है कि यहां आने वाली सभी महिलाएं हमेशा अपना सिर ढककर रखती हैं। इस वजह से यहां आने वाली महिलाओं को स्कार्फ या दुपट्टा साथ रखना चाहिए, ताकि वे अपना सिर ढक सकें।

साफ-सफाई का ध्यान रखें – अक्सर लोग किसी पर्यटन स्थल पर जाते हैं तो जाने-अनजाने में गंदगी फैलाते हैं, जैसे खाली बोतल रास्ते में फेंकना। इस प्रकार की गलती करने से बचें, क्योंकि यह स्थान बेहद साफ-सुथरा है।

डिस्क्लेमर: यह लेख धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। खबरगांव इसकी पुष्टि नहीं करता है।

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