Homeक्राइम (Crime)लखनऊ- फर्जी क्राइम ब्रांच अधिकारी बनकर वसूली करने वाला गिरफ्तार

लखनऊ- फर्जी क्राइम ब्रांच अधिकारी बनकर वसूली करने वाला गिरफ्तार

लखनऊ में एक शातिर ठग ने फर्जी क्राइम ब्रांच अधिकारी बनकर लोगों से अवैध वसूली का खेल खेला था। आरोपी खुद को पुलिस का बड़ा अधिकारी बताकर पीड़ितों को डराता और पैसे ऐंठता था। थाना नाका हिण्डोला पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। इस सफलता से फर्जीवाड़े के खिलाफ पुलिस की सख्ती एक बार फिर साबित हुई है।

आरोपी की पहचान और गिरफ्तारी

आरोपी की पहचान अर्जुन कुमार के रूप में हुई है। पीड़ित की शिकायत पर थाना नाका हिण्डोला पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया था। पुलिस टीम ने गुप्त सूचना और छानबीन के आधार पर आरोपी को सफलतापूर्वक दबोच लिया। गिरफ्तारी के दौरान आरोपी के कब्जे से अवैध वसूली की गई रकम भी बरामद की गई है।

फर्जी अधिकारी बनने का मॉडस ऑपरेंडी

अर्जुन कुमार खुद को क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताकर लोगों को फोन करता था या सीधे उनके पास पहुंच जाता था। वह गंभीर अपराध में नाम जुड़ने का डर दिखाकर पैसे मांगता था। फर्जी भाषा और अंदाज अपनाकर वह पीड़ितों को इतना डराता कि कई लोग बिना सोचे-समझे उसे पैसे दे देते थे। आरोपी फर्जी आईडी या अधिकारिक पहचान का इस्तेमाल कर अपनी विश्वसनीयता बनाए रखने की कोशिश करता था।

पुलिस की सफलता और बरामदगी

थाना नाका हिण्डोला पुलिस की टीम ने पीड़ित की शिकायत को गंभीरता से लिया और जल्दी से जल्दी आरोपी तक पहुंच बनाई। गिरफ्तारी के समय आरोपी के पास से वसूली की गई नकदी बरामद हुई है। पुलिस अब अर्जुन कुमार से विस्तार से पूछताछ कर रही है कि उसने कितने लोगों से वसूली की और क्या इस काम में कोई और साथी भी शामिल थे।

आगे की कानूनी कार्रवाई और जनता से अपील

पुलिस ने आरोपी अर्जुन कुमार के खिलाफ धोखाधड़ी, वसूली और जालसाजी की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। बरामद राशि को संबंधित पीड़ित को वापस करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

लखनऊ पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अजनबी को खुद को पुलिस अधिकारी बताने पर बिना सत्यापन के कोई भी राशि न दें। यदि कोई फर्जी अधिकारी धमकी दे या वसूली की कोशिश करे तो तुरंत नजदीकी पुलिस थाने या हेल्पलाइन पर सूचना दें।

यह कार्रवाई लखनऊ पुलिस की फर्जी पुलिस अधिकारियों और वसूली गिरोहों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति को दर्शाती है। आगे की जांच में और खुलासे होने की संभावना है।

 

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