दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को राजधानी में एक न्यूज एजेंसी के दफ्तर को सील कर दिया। दफ्तर में पुलिसिया कार्रवाई के खिलाफ खूब हंगामा मचा, पत्रकारों के साथ दिल्ली पुलिस पर बदसलूकी के आरोप लगे हैं। समाचार एजेंसी का नाम यूनाइटेड न्यूज इंडिया (UNI) है। न्यूज एजेंसी का मुख्यालय 9 रफी मार्ग पर है। अब ऑफिस को सील कर दिया गया है।
दिल्ली हाई कोर्ट ने 20 मार्च को एक फैसला सुनाया था, जिसके बाद पुलिस ने यह कार्रवाई की है। लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस (L&DO) ने 2023 में जमीन के आवंटन को रद्द कर दिया था। अब दिल्ली हाई कोर्ट ने भी जमीन आवंटन रद्द करने के फैसले को सही ठहाराया था। दिल्ली पुलिस ने कोर्ट के आदेश का पालन किया है।
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क्या यह जमीन, UNI की नहीं थी?
UNI को 1979 में प्रेस संस्थानों के लिए कम्पोजिट ऑफिस कॉम्प्लेक्स बनाने के लिए यह सरकारी जमीन मिली थी। 40 साल से ज्यादा समय तक कोई निर्माण नहीं हुआ। कोर्ट ने इसे शर्तों का गंभीर उल्लंघन माना। सरकार को तुरंत कब्जा लेने का निर्देश दिया। UNI ने इसे प्रेस की आजादी पर हमला बताया है। एजेंसी का आरोप है कि कर्मचारियों के साथ बदसलूकी की गई है। पुलिस ने उन्हें घसीटा था।
कोर्ट ने किस आधार पर यह फैसला दिया?
दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि UNI को कई बार मोहलत दी गई है। साल 1986, 1999 और 2000 में भी राहत मिली। मोहलत के बाद भी UNI ने बिल्डिंग प्लान नहीं बनाया, प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया से समझौता नहीं किया, निर्माण शुरू नहीं किया। साल 2022 में UNI ने अपनी खराब आर्थिक स्थिति का हवाा दिया। साल 2025 में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्युनल (NCLT) ने दिवालिया होने की स्थिति में इसका नियंत्रण द स्टेट्समैन लिमिटेड को दिया। यह एक एक प्राइवेट कमर्शियल कंपनी है। यह आवंटन की शर्तों के खिलाफ था। यह मूल रूप से मीडिया के संस्थागत उद्देश्य के लिए थी।
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दिल्ली हाई कोर्ट ने यह फैसला क्यों सुनाया?
दिल्ली हाई कोर्ट ने इसे अनधिकृत ट्रांसफर माना। कोर्ट ने सार्वजनिक जमीन के दुरुपयोग को रोकने के लिए लीज रद्द करने के फैसले को सार्वजनिक हित में जरूरी बताया। कोर्ट ने UNI के शो-कॉज नोटिस के जवाब को अस्पष्ट और आधारहीन करार दिया। यह भी तथ्य सामने आए कि जमीन पर कैंटीन चलाई गई, 70 फीसदी जगह, लीज पर देने की मांग की गई। प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने भी निर्माण में देरी और UNI के असहयोग पर शिकायत की थी। कोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि यह आवंटन, पूर्ण मालिकाना हक नहीं था। शर्तें तोड़ने पर इसे रद्द किया जा सकता है।
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कितनी कीमती है यह जमीन?
जमीन की वास्तविक कीमत हजारों करोड़ में है, जबकि स्टेट्समैन ने UNI को 100 करोड़ से कम दिए थे। नतीजतन, लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस ने कोर्ट के आदेश के बाद तुरंत कब्जा लिया और पुलिस ने ऑफिस सील कर दिया। हाई कोर्ट ने यह पाया कि UNI ने जमीन आवंटन की शर्तों का उल्लंघन किया है। कोर्ट ने कहा कि किसी भी सार्वजनिक जमीन का दुरुपयोग नहीं होने देना चाहिए। इसका इस्तेमाल, कानून के हिसाब से ही होना चाहिए।

















