बहराइच के सांसद डॉ. आनंद कुमार गोंड ने लोकसभा में शून्यकाल के दौरान बच्चों पर सोशल मीडिया के अनियंत्रित उपयोग से पड़ने वाले दुष्प्रभावों का मुद्दा उठाया। उन्होंने सरकार से 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के उपयोग को विनियमित करने और इस पर तत्काल ठोस कदम उठाने की मांग की। सांसद डॉ. गोंड ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश डिजिटल इंडिया की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, जिससे नागरिकों को कई सुविधाएं मिली हैं। हालांकि, इसके साथ ही बच्चों और युवाओं के लिए एक सुरक्षित डिजिटल वातावरण सुनिश्चित करना भी आवश्यक है। उन्होंने बताया कि भारत विश्व के सबसे युवा देशों में से एक है। डिजिटल युग में सोशल मीडिया का अत्यधिक और अनियंत्रित उपयोग, विशेष रूप से छोटे बच्चों के मानसिक, सामाजिक और शैक्षणिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है। डॉ. गोंड ने सदन को अवगत कराया कि कम उम्र के बच्चे सही-गलत का पूर्ण विवेक नहीं कर पाते। इसके कारण वे भ्रामक सूचनाओं, डीपफेक कंटेंट, साइबर बुलिंग और अनुचित सामग्री के प्रभाव में आ जाते हैं। उन्होंने बताया कि इससे बच्चों में चिंता, अवसाद, ध्यान की कमी, नींद की समस्या और आत्मविश्वास में गिरावट जैसी गंभीर समस्याएं देखी जा रही हैं। सांसद ने उल्लेख किया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन सहित कई अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों ने भी पुष्टि की है कि कम उम्र में सोशल मीडिया की लत बच्चों के समग्र विकास के लिए हानिकारक है। उन्होंने बताया कि दुनिया के कई देश इस खतरे को समझते हुए ठोस कदम उठा रहे हैं, जैसे ऑस्ट्रेलिया ने 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए सोशल मीडिया उपयोग पर प्रतिबंध लगाने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। डॉ. आनंद कुमार ने केंद्र सरकार से इस विषय पर गंभीरता से विचार करने का आग्रह किया। उन्होंने 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए सोशल मीडिया उपयोग को विनियमित करने, प्रभावी आयु-सत्यापन (Age Verification) प्रणाली लागू करने और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए सख्त दिशा-निर्देश बनाने की मांग की।
सांसद ने बच्चों पर सोशल मीडिया दुष्प्रभाव का मुद्दा उठाया:सदन में की चर्चा, सरकार से कड़े नियंत्रण और आयु सत्यापन प्रणाली की मांग
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