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5वीं तक परीक्षा नहीं, विदेशी नाम पर बैन; नेताओं की जांची जाएगी संपत्ति

नेपाल के नए प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह उर्फ बालेन ने 100 सूत्रीय सुधार एजेंडा पेश किया है। इसमें जेन जी आंदोलन के पीड़ितों को न्याय, नौकरशाही में गैर-राजनीतिकरण, भ्रष्टाचार विरोधी अभियान, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और प्रशासनिक पुनर्गठन शामिल है। साल 1990 से नेताओं और अधिकारियों की संपत्ति की जांच होगी। 15 दिनों में संपत्ति जांच समिति का गठन किया जाएगा। वहीं एक हफ्ते में हाई लेवल कमेटी बनाई जाएगी, जो जेन जी आंदोलन की जांच करेगी। बालेन सरकार ने मंत्रालयों की संख्या 22 से घटाकर 16 करने का निर्णय लिया है।

संपत्ति जांच: बालेन सरकार 15 दिन में एक ताकतवर संपत्ति जांच समिति का गठन करेगी। यह कमेटी देश के नेताओं और बड़े अधिकारियों की अवैध संपत्ति की जांच करेगी। पहले चरण में 2006 से 2026 तक की संपत्ति जांची जाएगी। दूसरे चरण में 1990 तक का संपत्ति विवरण खंगाला जाएगा। समिति में कानून और वित्तीय मामलों के जानकारों को शामिल किया जाएगा। इनकी सिफारिश और सहायता से अवैध संपत्ति की वसूली की जाएगी।

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डाक सेवा में सुधार: नेपाल की नई सरकार सार्वजनिक सेवा वितरण में भी सुधार करेगी। डाक सेवाओं को आधुनिक बनाया जाएगा। नए सुधारों के बाद ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट, नागरिकता प्रमाण पत्र 100 दिनों के भीतर लोगों के घरों तक पहुंचेंगे। लोगों को समय पर सेवा मिलेगी और दलाली भी बंद होगी।

नौकरशाही में सियासत नहीं: बालेन सरकार ने नौकरशाही को सियासत से अलग करने का फैसला किया है। अब कोई कर्मचारी किसी दल का सदस्य नहीं बन पाएगा। सरकारी कार्यालयों से ट्रे़ड यूनियनों को खत्म किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इस फैसले से नौकरशाही पर सियासत हावी नहीं होगी। लोगों को बिना पक्षपात के सेवाएं मिल सकेंगी।

शिक्षा व्यवस्था: नेपाल की सरकार ने नागरिकता प्रक्रिया को सरल बनाने के अलावा कक्षा पांच तक कुछ आंतरिक परीक्षाओं को खत्म करने का निर्णय लिया है। अब छात्रों का मूल्यांकन वैकल्पिक और मनोवैज्ञानिक तरीके से होगा। अगले वित्तीय वर्ष से शिक्षकों की पेंशन और रिकॉर्ड का कामकाज देखने का अधिकार प्रांतीय सरकारों को होगा।

विदेशी नाम नहीं: नेपाल की नई सरकार शिक्षा व्यवस्था में राष्ट्रीय पहचान बढ़ाना चाहती है। यही कारण है कि उसने सेंट जेवियर्स, ऑक्सफोर्ड जैसे नामों वाले स्कूलों को नाम बदलने का निर्देश दिया है। साल के आखिरी तक इन स्कूलों को नेपाली पहचान वाले नाम रखने होंगे।

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छात्र परिषद: पिछले साल जेन जी आंदोलन में घायल प्रदर्शनकारियों को पुनर्वास की सुविधा मिलेगी। न्याय भी सुनिश्चित किया जाएगा। जान गंवाने वाले युवाओं को श्रद्धाजंलि दी गई। 90 दिनों के भीतर छात्र परिषदों का गठन किया जाएगा, ताकि उनका प्रतिनिधित्व भी तय किया जा सके। उन्हें किसी भी सियासी दखल के बिना अपनी बात रखने का मंच मिलेगा। इन छात्र परिषदों का किसी भी सियासी दल से तालुक नहीं होगा।

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