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NEP-2020 की राह पर बस्ती के शिक्षक:डायट में ‘प्रज्ञा प्रवाह’ शुरू, अब किताबों के साथ संस्कार भी पढ़ाए जाएंगे

#बस्ती_न्यूज

राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत शिक्षा को केवल अंकों और विषय ज्ञान तक सीमित न रखकर संस्कार, संवेदनशीलता और संवैधानिक मूल्यों से जोड़ने की दिशा में बस्ती डायट ने बड़ा कदम उठाया है। बुधवार से जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) में तीन दिवसीय ‘प्रज्ञा प्रवाह’ प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। 5 से 7 अगस्त तक चलने वाले इस प्रशिक्षण में जिले के बेसिक और माध्यमिक विद्यालयों के 100 शिक्षक भाग ले रहे हैं। कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों को ऐसा मार्गदर्शक बनाना है, जो विद्यार्थियों को केवल पढ़ाई ही नहीं, बल्कि जिम्मेदार और संवेदनशील नागरिक बनने की प्रेरणा भी दें। दीप प्रज्ज्वलन के साथ प्रशिक्षण का शुभारंभ प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ डायट प्राचार्य संजय कुमार शुक्ल और वरिष्ठ प्रवक्ता महेंद्र नाथ त्रिपाठी ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन कर किया। उद्घाटन सत्र में शिक्षा को समाज परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम बताते हुए प्रशिक्षुओं से पूरे मनोयोग के साथ प्रशिक्षण में भाग लेने का आह्वान किया गया। ‘शिक्षक केवल पढ़ाने वाला नहीं, समाज का संस्कार निर्माता’ डायट प्राचार्य संजय कुमार शुक्ल ने कहा कि शिक्षक केवल विषयों का अध्यापन करने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि समाज में मूल्यों का संवाहक होता है। यदि शिक्षक स्वयं मानवीय और संवैधानिक मूल्यों को व्यवहार में अपनाएंगे, तभी विद्यार्थी जिम्मेदार नागरिक बन सकेंगे। वहीं वरिष्ठ प्रवक्ता महेंद्र नाथ त्रिपाठी ने कहा कि आधुनिक शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान देना नहीं, बल्कि संविधान की भावना और सामाजिक उत्तरदायित्व से युक्त नागरिक तैयार करना है। तीन दिन तक विशेषज्ञ देंगे व्यवहारिक प्रशिक्षण प्रशिक्षण की नोडल अधिकारी डॉ. ऋचा शुक्ला ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि तीन दिवसीय कार्यशाला में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा-2023, मानवीय एवं संवैधानिक मूल्य, मौलिक कर्तव्य, प्रभावी संप्रेषण, समावेशी शिक्षा, बाल अधिकार, विद्यालय प्रबंधन और माइंडफुलनेस जैसे विषयों पर गतिविधि आधारित सत्र आयोजित किए जाएंगे। प्रतिभागियों को व्यवहारिक शिक्षण योजना तैयार करने का भी प्रशिक्षण मिलेगा। पहले दिन विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव प्रथम दिवस में अलीउद्दीन ने मानवीय मूल्यों का परिचय कराया। शशि दर्शन त्रिपाठी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा-2023 के संदर्भ में संवैधानिक मूल्यों की उपयोगिता बताई। डॉ. ऋचा शुक्ला ने मौलिक कर्तव्यों पर विस्तार से चर्चा की, जबकि वंदना चौधरी ने परिवार और समाज की भूमिका पर अपने विचार रखे। आगामी सत्रों में विद्यालयी जीवन में मूल्यों के समावेश और समावेशी शिक्षण की रणनीतियों पर चर्चा होगी। 100 शिक्षकों ने लिया मूल्य आधारित शिक्षा का संकल्प प्रशिक्षण में बेसिक शिक्षा विभाग के 80 और माध्यमिक विद्यालयों के 20 शिक्षक शामिल हुए। सभी प्रतिभागियों ने विद्यालयों में मूल्य आधारित शिक्षा को प्रभावी रूप से लागू करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. ऋचा शुक्ला और डॉ. रविनाथ ने किया। प्रशिक्षण को सफल बनाने में डॉ. गोविन्द प्रसाद, सरिता चौधरी, नवनीत वर्मा, अनिल चौधरी तथा डीएलएड प्रशिक्षु आकाश और ज्ञानेंद्र ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। तीन दिवसीय यह पहल शिक्षकों की व्यावसायिक दक्षता बढ़ाने के साथ विद्यालयों में संवेदनशील, समावेशी और मूल्यपरक शिक्षण वातावरण विकसित करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।
#बस्ती न्यूज़ टुडे

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