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होर्मुज पर गहराते संकट के बीच भारत तैयारी में, पीएम मोदी ने की हाई-लेवल मीटिंग

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब वैश्विक तेल बाजार में बहुत उतार-चढ़ाव है। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत लगभग 109-112 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई है। एक समय में तो यह 119 डॉलर तक भी पहुंच गई थी।

यह बैठक इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत तेल का बड़ा आयातक देश है। दुनिया के अधिकांश तेल पश्चिम एशिया से आते हैं। वहां का तनाव बढ़ने से ऊर्जा सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा है।

बैठक के दौरान एक अच्छी खबर भी आई। अमेरिका से एक एलपीजी टैंकर भारत के पश्चिमी तट पर पहुंचा। इससे देश में गैस की आपूर्ति में कुछ राहत मिली है। लोग चिंतित थे कि ऊर्जा की कमी हो सकती है, लेकिन यह टैंकर मददगार साबित हुआ।

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पश्चिम एशिया में हालात खराब

पश्चिम एशिया में हालात अभी भी खराब हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद रखेगा, तो वाशिंगटन ईरान के बिजली ढांचे पर हमला कर सकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का बहुत महत्वपूर्ण रास्ता है, जहां से बहुत सारे तेल वाले जहाज गुजरते हैं।

ईरान ने भी दागीं मिसाइलें

ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई की है। इजरायल ने ईरान के नतांज न्यूक्लियर फेसिलिटी पर हमला किया था, जिसके बदले ईरान ने इजराइल के मध्य भाग में एक न्यूक्लियर फेसिलिटी पर हमला किया। दोनों तरफ से हमले हो रहे हैं, जिससे युद्ध और फैलने का खतरा बढ़ गया है।

हूती विद्रोहियों ने दी चेतावनी

इसके अलावा, यमन के हूती विद्रोहियों ने भी चेतावनी दी है। वे ईरान के साथ मिलकर युद्ध में शामिल हो सकते हैं। उन्होंने लाल सागर और स्वेज नहर में जहाजों पर हमले की धमकी दी है। अगर ऐसा हुआ तो वैश्विक व्यापार और तेल की आपूर्ति पर बहुत बुरा असर पड़ेगा।

आपूर्ति पर चर्चा

प्रधानमंत्री मोदी ने बैठक में मुख्य रूप से इस बात पर जोर दिया कि देश के जरूरी क्षेत्रों में कोई रुकावट न आए। पेट्रोलियम, क्रूड ऑयल, गैस, बिजली और खाद की आपूर्ति सुचारू रूप से चलती रहे। बैठक में इन सभी चीजों की विस्तार से समीक्षा की गई।

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सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री ने लॉजिस्टिक्स और वितरण नेटवर्क की भी जांच की। उन्होंने कहा कि पूरे देश में आपूर्ति स्थिर रहे और कहीं भी रुकावट न आए। सरकार का प्रयास है कि आम लोगों पर तेल की ऊंची कीमतों का बोझ न पड़े। भारत रूस से भी तेल खरीद रहा है और अन्य विकल्प तलाश रहा है। लेकिन पश्चिम एशिया का संघर्ष बड़ा चुनौती है।

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