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प्रसव पीड़ा से तड़पती रही प्रसूता, नर्सों के ‘शिफ्ट’ के खेल में मासूम ने तोड़ा दम

सीएचसी जगदौर में संसाधनों का टोटा, परिजनों ने बाहर से खरीदीं दवाइयां और उपकरण।

रिपोर्ट:गजेंद्र गुप्त।

महराजगंज (मिठौरा)। जनपद के मिठौरा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) जगदौर इन दिनों बदहाली और कर्मचारियों की संवेदनहीनता का केंद्र बन गया है। शनिवार को स्वास्थ्य केंद्र की भारी लापरवाही के कारण एक नवजात को दुनिया देखने से पहले ही अपनी जान गंवानी पड़ी। स्टाफ नर्सों की आपसी खींचतान और ड्यूटी से नदारद रहने के कारण हरपुर कला निवासी एक परिवार की खुशियां मातम में बदल गईं।


नर्स ने फोन नहीं उठाया, तड़पती रही महिला
हरपुर कला निवासी चंद्रभान प्रसाद शनिवार सुबह 9 बजे अपनी बहू संजू देवी को प्रसव पीड़ा होने पर सीएचसी जगदौर लेकर आए थे। परिजनों का आरोप है कि शाम 4 बजे ड्यूटी पर तैनात नर्स सीमा मिश्रा ने जांच के बाद प्रसव कराया,इस दौरान घोर लापरवाही बरती गई। सीमा मिश्रा का कहना है कि उनकी ड्यूटी समाप्त हो चुकी थी, उन्होंने अगली शिफ्ट की नर्स रिंकी को बार-बार फोन किया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। घंटों तक प्रसूता वार्ड में तड़पती रही और कोई उसकी सुध लेने वाला नहीं था।

रेफर के बाद रास्ते में हुई मौत।
परिजनों का गंभीर आरोप है कि बच्चा नॉर्मल डिलीवरी की स्थिति में नहीं था, लेकिन नर्स द्वारा जबरन प्रसव कराया गया। प्रसव के बाद बच्चा रोया नहीं, जिसके बाद उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में मासूम ने दम तोड़ दिया।

जेब ढीली कर रहे मरीज, अस्पताल में दवाओं का टोटा सरकारी दावों के उलट सीएचसी जगदौर में मरीजों को हर छोटी चीज के लिए बाहर भेजा जा रहा है। पीड़ित परिवार ने बताया कि प्रसव के दौरान उपयोग होने वाले यंत्र और जरूरी दवाइयां भी उन्हें प्राइवेट मेडिकल स्टोर से लानी पड़ीं। अस्पताल के एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यहां स्टाफ की भारी कमी है और बुनियादी सुविधाओं के नाम पर सिर्फ औपचारिकता पूरी की जा रही है।

जर्जर भवन और बदबूदार पानी के बीच कैसे हो इलाज

अस्पताल की व्यवस्था इतनी पंगु हो चुकी है कि डॉक्टरों और कर्मचारियों को आवंटित मकान जर्जर हाल में हैं। परिसर की पानी की टंकी से बदबू आती है और शौचालय टूटे पड़े हैं। ऐसे में रात में ड्यूटी करना कर्मचारियों के लिए भी चुनौती बना हुआ है। जब डॉक्टर और स्टाफ खुद इन हालातों से जूझ रहे हैं, तो मरीजों को बेहतर इलाज मिलना नामुमकिन साबित हो रहा है।

प्रभारी चिकित्सक दयानंद सिंह CHC जगदौर ने क्या कहा
> “मुझे चार्ज लिए अभी कुछ ही समय हुआ है, इसलिए पूरी व्यवस्था की जानकारी नहीं है। स्टाफ की कमी जरूर है, जिससे कुछ दिक्कतें आ रही हैं। 8 घंटे की जगह 12-12 घंटे ड्यूटी कराई जा रही है। कमियों को जल्द दूर करने का प्रयास किया जाएगा।”

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