उत्तर प्रदेश की सियासत में इन दिनों ग्राम प्रधानी से लेकर जिला पंचायत की कुर्सी तक को लेकर हलचल तेज हो गई है। प्रदेश के लाखों उम्मीदवार और ग्रामीण जनता इस उधेड़बुन में है कि आखिर UP Panchayat Chunav 2026 की रणभेरी कब बजेगी। इस अनिश्चितता के बादलों को छांटते हुए प्रदेश के पंचायती राज मंत्री और सुभासपा अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने एक बड़ा बयान दिया है। राजभर ने स्पष्ट कर दिया है कि राज्य सरकार किसी भी हाल में संवैधानिक समय सीमा का उल्लंघन नहीं करेगी। उनके बयान से यह साफ हो गया है कि जुलाई 2026 तक उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की प्रक्रिया हर हाल में पूरी कर ली जाएगी। इस घोषणा के बाद से ही गांवों की चौपालों पर चुनावी चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है।
तैयारियां तेज: मतपत्रों की छपाई और मतदाता सूची का काउंटडाउन
UP Panchayat Chunav 2026 के तकनीकी पहलुओं पर बात करते हुए मंत्री राजभर ने बताया कि विभाग और निर्वाचन आयोग हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठा है। जमीनी स्तर पर तैयारियां युद्ध स्तर पर जारी हैं। जिलों में मतपत्रों की छपाई का काम लगभग पूरा हो चुका है और सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव यानी ‘मतदाता सूची’ का अंतिम प्रकाशन 15 अप्रैल तक कर दिया जाएगा। राजभर का कहना है कि सरकार हाईकोर्ट के निर्देशों का अक्षरशः पालन करने के लिए प्रतिबद्ध है। चुनाव प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की कानूनी अड़चन न आए, इसके लिए निर्वाचन आयोग के साथ मिलकर एक फुलप्रूफ खाका तैयार किया गया है। मतदाता सूची के अपडेट होते ही चुनावी बिसात बिछना शुरू हो जाएगी।
आरक्षण का पेंच: 2011 की जनगणना ही बनेगी आधार
UP Panchayat Chunav 2026 में सबसे ज्यादा सस्पेंस ‘आरक्षण’ को लेकर रहता है। इस पर स्थिति साफ करते हुए ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि ओबीसी आरक्षण के निर्धारण के लिए जल्द ही एक समर्पित आयोग का गठन किया जाएगा। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि फिलहाल किसी नई जातिगत गणना की प्रतीक्षा नहीं की जाएगी; बल्कि साल 2011 की जनगणना के आंकड़ों को ही आरक्षण का आधार बनाया जाएगा। आयोग की रिपोर्ट मिलते ही आरक्षण की अंतिम सूची जारी कर दी जाएगी। राजभर ने कड़े शब्दों में कहा कि भले ही कुछ पदों का कार्यकाल अलग-अलग समय पर समाप्त हो रहा हो, लेकिन किसी को भी जुलाई 2026 से आगे का विस्तार नहीं मिलेगा। यानी ‘नो एक्सटेंशन’ की नीति के साथ चुनाव समय पर ही होंगे।
इलाहाबाद हाईकोर्ट का सख्त रुख
एक तरफ सरकार जुलाई 2026 का लक्ष्य लेकर चल रही है, तो दूसरी तरफ इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मामले में काफी सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग से तीखा सवाल पूछा है कि क्या 15 अप्रैल को मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद 26 मई तक चुनाव संपन्न कराना संभव है? कोर्ट ने इस पर बाकायदा हलफनामा मांगा है। कोर्ट की इस सक्रियता ने प्रशासन पर दबाव बढ़ा दिया है। अब देखना यह होगा कि क्या आयोग और सरकार कोर्ट के सुझावों के अनुसार प्रक्रिया में और तेजी लाते हैं या जुलाई 2026 की डेडलाइन पर ही कायम रहते हैं। फिलहाल, राजभर के बयान ने उन अटकलों पर विराम लगा दिया है जिसमें UP Panchayat Chunav 2026 के लंबे समय तक टलने की बात कही जा रही थी।
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