VIDEO: ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। शनिवार रात को दक्षिणी इजरायल के शहर डिमोना और अराद में हुए मिसाइल हमलों ने लोगों के दिलों में दहशत भर दी। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में आसमान से तेजी से गिरता एक आग का गोला दिखाई देता है, जिसके बाद तेज धमाका होता है और आसपास का इलाका हिल जाता है। धमाके की तीव्रता इतनी ज्यादा थी कि कई घरों की खिड़कियां और दरवाजे टूटकर बिखर गए। लोग अपने घरों के अंदर ही डर के साए में दुबके नजर आए। हालांकि, इन वीडियो की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है, लेकिन इनसे सामने आई तस्वीरें हालात की भयावहता को साफ बयां करती हैं।
मलबे में तब्दील इमारतें, दर्जनों घायल—बच्चे और महिलाएं भी शिकार
समाचार एजेंसी के मुताबिक, इस हमले में अराद शहर सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है, जहां करीब 84 लोग घायल हुए हैं। इनमें से 10 लोगों की हालत गंभीर बताई जा रही है। वहीं डिमोना में भी 33 लोग जख्मी हुए हैं। घायलों में एक 10 साल का बच्चा शामिल है, जिसे मिसाइल के छर्रे लगने से गंभीर चोटें आई हैं। इसके अलावा एक 40 वर्षीय महिला की हालत भी नाजुक बनी हुई है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, धमाके के बाद हर तरफ धूल और मलबा फैल गया था और कई इमारतें पूरी तरह ढह गईं। राहत और बचाव टीमों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर घायलों को अस्पताल पहुंचाया, लेकिन हमले के बाद इलाके में दहशत का माहौल अभी भी बना हुआ है।
परमाणु केंद्र के पास हमला, लेकिन राहत की खबर भी आई सामने
डिमोना का महत्व इस वजह से और बढ़ जाता है क्योंकि यह इजरायल के प्रमुख परमाणु अनुसंधान केंद्र के बेहद करीब स्थित है। यह केंद्र नेगेव रेगिस्तान में 1958 से सक्रिय है और देश की सुरक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा माना जाता है। ऐसे में इस क्षेत्र पर हमला बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि इस हमले से किसी भी परमाणु सुविधा को नुकसान नहीं पहुंचा है और न ही रेडिएशन का कोई असामान्य स्तर पाया गया है। यह जानकारी कुछ हद तक राहत देने वाली जरूर है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के हमले भविष्य में बड़े खतरे का संकेत भी हो सकते हैं।
नतान्ज हमले का बदला या बड़ी रणनीति? बढ़ता जा रहा टकराव
विश्लेषकों का कहना है कि यह हमला ईरान के नतान्ज परमाणु संवर्धन केंद्र पर पहले हुए हमले का जवाब हो सकता है। नतान्ज में मौजूद भूमिगत सेंट्रीफ्यूज ईरान के यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम का अहम हिस्सा हैं और इससे पहले हुए हमलों में इन्हें नुकसान पहुंचा था। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर ने दावा किया है कि उन्होंने दक्षिणी इजरायल के अलावा अन्य सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया है। हालांकि कुवैत और यूएई को लेकर किए गए दावों की अभी पुष्टि नहीं हुई है। इस पूरे घटनाक्रम ने मध्य पूर्व में तनाव को और बढ़ा दिया है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता भी गहरा गई है। अब सवाल यह है कि क्या यह टकराव यहीं थमेगा या आने वाले दिनों में और बड़े हमलों की आहट है।
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