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‘वतन के लिए मरना ही जीना है…’, अमेरिका से यह कहने पर क्यों मजबूर हुआ क्यूबा?


अमेरिका और ईरान के बीच जारी विवाद पर पूरी दुनिया की नजर है और इस बीच राष्ट्रपति ट्रंप एक अन्य देश को भी चेतावनी दे चुके हैं। ट्रंप द्वीपीय राष्ट्र क्यूबा के नेतृत्व को भ्रष्ट बता चुके हैं और उन पर आर्थिक प्रतिबंध लगा चुके हैं। हाल ही में अमेरिका ने वेनेजुएला पर हमला कर वहां सत्ता परिवर्तन किया था। ऐसे मे अब क्यूबा सतर्क हो गया है। क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डियाज-कैनेल ने कहा है कि अमेरिका के पास उन पर सैन्य हमला करने या उन्हें सत्ता से हटाने का कोई वैध कारण नहीं है।

एनबीसी न्यूज के ‘मीट द प्रेस’ कार्यक्रम को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि क्यूबा पर किसी भी तरह का आक्रमण महंगा साबित होगा और क्षेत्रीय सुरक्षा को प्रभावित करेगा। डियाज-कैनेल ने कहा कि हालांकि, अगर ऐसा होता है तो क्यूबा के लोग अपना बचाव करेंगे। उन्होंने अपने इंटरव्यू में अमेरिका और क्यूबा के बीच संबंधों पर अपना पक्ष रखा।

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क्या क्यूबा पर हमला करेगा अमेरिका?

अमेरिका और क्यूबा के बीच संबंध ठीक नहीं हैं और कूटनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अमेरिका ने जो ऑपरेशन वेनेजुएला में किया था उसी तरह का ऑपरेशन वह क्यूबा पर भी कर सकता है। इन्हीं प्रश्नों का जवाब देते हुए डियाज-कैनेल ने कहा, ‘अगर वह समय आता है, तो मुझे नहीं लगता कि अमेरिका के पास क्यूबा के खिलाफ सैन्य आक्रमण शुरू करने, किसी सर्जिकल ऑपरेशन और राष्ट्रपति के अपहरण का कोई औचित्य होगा।’

संघर्ष करने की बात कही

क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डियाज-कैनेल ने कहा है कि, ‘अगर अमेरिका उन पर सैन्य कार्रवाई करता है तो लड़ाई होगी, संघर्ष होगा और हम अपना बचाव करेंगे। जरूरत पड़ी तो हम मरेंगे भी, क्योंकि हमारे राष्ट्रगान में कहा गया है कि वतन के लिए मरना ही जीना है।’


उनके यह बयान ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच बातचीत की पुष्टि के बावजूद तनाव बना हुआ है। हालांकि, यह बात अभी सार्जनिक नहीं की गई है कि दोनों देशों के बीच किन मु्द्दों पर और क्या बातचीत हो रही है। डियाज-कैनेल ने अमेरिका पर क्यूबा के खिलाफ शत्रुतापूर्ण नीतिअपनाने का आरोप लगाया और कहा कि उसे क्यूबा से कोई मांग करने का नैतिक अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि क्यूबा बिना किसी शर्त के बातचीत के लिए और किसी भी विषय पर चर्चा के लिए तैयार है।

क्यूबा में बढ़ रहा आर्थिक संकट

उन्होंने कहा कि क्यूबा अपने राजनीतिक तंत्र में बदलाव की मांग स्वीकार नहीं करेगा, जैसे वह अमेरिकी व्यवस्था में बदलाव की मांग नहीं करता। क्यूबा ने अपने गहराते आर्थिक संकट के लिए अमेरिकी ऊर्जा नाकेबंदी को जिम्मेदार ठहराया है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं, सार्वजनिक परिवहन और वस्तुओं एवं सेवाओं के उत्पादन पर असर पड़ा है।

देश अपनी जरूरत का केवल लगभग 40 प्रतिशत ईंधन ही उत्पादन करता है और जनवरी में वेनेजुएला से तेल आपूर्ति बंद होने के बाद स्थिति और बिगड़ गई। मार्च में रूस से कच्चे तेल से भरा एक टैंकर क्यूबा पहुंचा, जो तीन महीने में पहली आपूर्ति थी और रूस ने एक और टैंकर भेजने का आश्वासन दिया है।

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ट्रंप बता चुकें हैं भ्रष्ट नेतृत्व

इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने क्यूबा सरकार की आलोचना करते हुए कहा था कि वहां का नेतृत्व भ्रष्ट है और तेल आपूर्ति से कोई फर्क नहीं पड़ेगा। डियाज-कैनेल ने ट्रंप के बयानों को चेतावनी के रूप में लिया और कहा कि क्यूबा को अपने लोगों, परियोजना और देश की रक्षा के लिए तैयार रहना होगा।

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