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महराजगंज: CMO के आदेशों को ठेंगा दिखा रहे कर्मचारी.. 100 दिवसीय क्षय उन्मूलन अभियान अधर में



रिपोर्ट:गजेंद्र कुमार गुप्त।

महराजगंज। जनपद में टीबी मुक्त भारत अभियान को सफल बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग के प्रयास दांव पर लगे हैं। मुख्य चिकित्साधिकारी (CMO) द्वारा राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के तहत जारी किए गए स्थानांतरण और कार्य आवंटन आदेशों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। ताजा मामला जिले के विभिन्न सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और टीबी यूनिट्स (TU) का है, जहां तैनात टीबीएचवी (TBHV) कर्मचारियों ने सप्ताह भर बाद भी नए केंद्रों पर कार्यभार नहीं संभाला है।


क्या था मुख्य चिकित्साधिकारी का आदेश


बीते 10 अप्रैल 2026 को मुख्य चिकित्साधिकारी, महराजगंज ने पत्रांक संख्या 292 के जरिए एक आधिकारिक आदेश जारी किया था। इसके तहत जनपद में संचालित 100 दिवसीय विशेष अभियान के सफल संचालन हेतु 6 टीबीएचवी कर्मचारियों को अलग-अलग केंद्रों पर सप्ताह के दिनों के आधार पर तैनात किया गया था।

तालिका के अनुसार नई तैनाती।
विशाल सिंह डीटीसी (सोम-बुध) एवं परतावल (गुरु-शनि)नरेन्द्र त्यागी सिसवा (सोम-बुध) एवं घुघली (गुरु-शनि) विमलेश कुमार फरेन्दा (सोम-बुध) एवं धानी (गुरु-शनि) अजेन्द्र प्रताप सिंह डीटीसी (सोम-बुध) एवं मिठौरा (गुरु-शनि) अंकिता पाण्डेय बृजमनगंज (सोम-बुध) एवं लक्ष्मीपुर (गुरु-शनि) तथा सुशील श्रीवास्तव को निचलौल (सोम-बुध) एवं नौतनवा (गुरु-शनि)किया गया हैं

आदेश की अवहेलना और व्यवस्था पर सवाल
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, आदेश जारी होने के कई दिन बीत जाने के बावजूद अभी तक किसी भी कर्मचारी ने आवंटित नई टीयू (TU) पर अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं कराई है। नियमानुसार, इन कर्मचारियों को संबंधित अधीक्षक से उपस्थिति प्रमाण-पत्र प्रतिहस्ताक्षरित कराकर जिला क्षय रोग अधिकारी कार्यालय में जमा करना था, लेकिन धरातल पर स्थिति इसके उलट है।

अधिकारियों की चुप्पी और बढ़ता संकट
100 दिवसीय अभियान का उद्देश्य टीबी के मरीजों की समय पर पहचान और उनका समुचित इलाज सुनिश्चित करना है। ऐसे में कर्मचारियों द्वारा अपने पद के अनुरूप कार्य न करना और अधिकारियों के निर्देश को अनसुना करना विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि समय रहते इन पर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो शासन की इस महत्वपूर्ण योजना का विफल होना तय है।अब देखना यह होगा कि मुख्य चिकित्साधिकारी इस अनुशासनहीनता पर क्या रुख अपनाते हैं और इन लापरवाह कर्मचारियों के खिलाफ क्या दंडात्मक कार्रवाई की जाती है।

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