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ट्रंप के ऐलान के बाद भी हमले जारी, ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत से इनकार किया

अमेरिका और इजराइल के द्वारा ईरान पर शुरू किए गए हमले का आज मंगलवार को 25वां दिन है. इन चार हफ्तों के घटनाक्रम में अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से कई गई घोषणा अहम है. उन्होंने 5 दिनों के लिए हमले रोकने का ऐलान किया है. ट्रंप ने सोमवार को कहा कि ईरान ने परमाणु हथियार न रखने पर सहमति जताई है. ट्रंप ने आगे कहा कि अब, ईरान के पास अमेरिका और हमारे सहयोगियों के लिए अपने खतरों को खत्म करने का एक और मौका है और हमें उम्मीद है कि वे इसका लाभ उठाएँगे. चाहे कुछ भी हो, अमेरिका और पूरी दुनिया जल्द ही कहीं ज्यादा सुरक्षित होंगे. उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने उनके रक्षा औद्योगिक आधार को पूरी तरह से तबाह कर दिया है और उनकी नौसेना को खत्म कर दिया है. हालांकि हालाँकि ईरान की संसद के स्पीकर एम.बी. गालिबफ ने ट्रंप की कड़ी आलोचना की. उन्होंने तेहरान और वॉशिंगटन के बीच चल रही बातचीत के बारे में ट्रंप के दावों को खारिज करते हुए कहा कि ऐसी कोई बातचीत नहीं हुई है. गालिबफ ने अमेरिकी राष्ट्रपति के दावों को खारिज करते हुए कहा कि ये बयान वित्तीय और तेल बाजारों में हेरफेर करने के लिए दिए गए. इनमें इस संघर्ष के बीच काफी उथल-पुथल देखने को मिली है. इस बीच युद्ध को लेकर पूरे पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बना हुआ है.

 

जयशंकर ने मार्को रूबियो से ऊर्जा सुरक्षा पर चर्चा की

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के साथ फोन पर विस्तार से बातचीत की जिसमें पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर इसके असर पर खास तौर पर चर्चा हुई. एक्स पर एक पोस्ट में जयशंकर ने कहा कि दोनों नेताओं ने संघर्ष के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर पर भी चर्चा की. अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रूबियो के साथ फोन पर विस्तार से बातचीत हुई. पोस्ट में लिखा, ‘हमारी चर्चा पश्चिम एशिया संघर्ष और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर इसके असर पर केंद्रित थी. हमने खास तौर पर ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं पर बात की. संपर्क में बने रहने पर सहमति बनी.’ यह चर्चा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आज पहले किए गए उस ऐलान के बाद हुई, जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्होंने अमेरिकी युद्ध विभाग को निर्देश दिया है कि ईरान के पावर प्लांट और ऊर्जा स्थलों के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई को पांच दिनों के लिए टाल दिया जाए. उन्होंने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच तेहरान के साथ चल रही कूटनीतिक बातचीत का हवाला देते हुए यह निर्देश दिया. ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच पिछले दो दिनों में ‘बहुत अच्छी और सार्थक बातचीत’ हुई है. इसका मकसद इस क्षेत्र में आपसी दुश्मनी को खत्म करना है.

हम ईरान और लेबनान दोनों जगहों पर हमले जारी रखे हुए हैं: नेतन्याहू

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ट्वीट किया, ‘आज इससे पहले मैंने अपने मित्र राष्ट्रपति ट्रंप से बात की. राष्ट्रपति ट्रंप का मानना ​​है कि अमेरिकी सेना के साथ हमने जो जबरदस्त उपलब्धियाँ हासिल की है, उनका लाभ उठाकर समझौते में तय युद्ध के उद्देश्यों को पूरा करने का एक अवसर है. एक ऐसा समझौता जो हमारे अहम हितों की रक्षा करेगा. साथ ही, हम ईरान और लेबनान, दोनों जगहों पर हमले जारी रखे हुए हैं. हम मिसाइल कार्यक्रम और परमाणु कार्यक्रम को कुचल रहे हैं और हिज्बुल्लाह पर लगातार कड़े प्रहार कर रहे हैं. कुछ ही दिन पहले, हमने दो और परमाणु वैज्ञानिकों को मार गिराया और हमारा हाथ अभी भी आगे बढ़ा हुआ है. हम किसी भी स्थिति में अपने अहम हितों की रक्षा करेंगे.’

अमेरिकी नेताओं के ईरानी अधिकारियों से मुलाकात पर प्रेस सेक्रेटरी ने दिया ये जवाब

न्यूज एजेंसी एएनआई ने व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट से संपर्क किया और पूछा कि क्या अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वैंस, शांति मिशन के लिए अमेरिका के विशेष राष्ट्रपति दूत स्टीव विटकॉफ और बिजनेसमैन व अमेरिका के राष्ट्रपति के पूर्व वरिष्ठ सलाहकार जेरेड कुशनर इस हफ़्ते इस्लामाबाद में ईरानी अधिकारियों से मुलाकात करेंगे. व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने जवाब दिया, ‘ये संवेदनशील कूटनीतिक बातचीत है और अमेरिका प्रेस के जरिए बातचीत नहीं करेगा. यह एक बदलती हुई स्थिति है और मुलाकातों के बारे में लगाए जा रहे अंदाजों को तब तक अंतिम नहीं माना जाना चाहिए, जब तक कि व्हाइट हाउस द्वारा उनकी औपचारिक घोषणा न कर दी जाए.’

ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत से इनकार किया

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाकाई ने इस बात से इनकार किया कि तेहरान ने वाशिंगटन के साथ बातचीत की है. उन्होंने जोर देकर कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य और युद्ध खत्म करने की शर्तों पर इस्लामिक गणराज्य का रुख नहीं बदला है. बाकाई ने सोमवार को सरकारी समाचार एजेंसी ईरना( IRNA) को बताया कि फरवरी के आखिर में अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमले की शुरुआत के बाद से ईरान का वाशिंगटन के साथ न तो कोई संपर्क हुआ है और न ही होर्मुज और थोपे गए युद्ध को खत्म करने की शर्तों पर उसका रुख बदला है. इससे पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि उन्होंने युद्ध विभाग को ईरानी बिजली संयंत्रों पर हमले पांच दिनों के लिए टालने का आदेश दिया है. उन्होंने दावा किया कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच ‘सार्थक बातचीत’ हुई. ट्रंप ने यह चेतावनी दी थी कि तेहरान ने होर्मुज में हालात सामान्य नहीं बनाए तो उसके ऊर्जा सुविधाओं पर हमले करेगा. इसके जवाब में ईरान ने फारसी खाड़ी में स्थित उन बिजली स्टेशनों और ऊर्जा सुविधाओं की एक सूची जारी की जिन्हें वह निशाना बनाया जा सकता था.

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